स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदाय होगा पोषण आहार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज सम्पन्न मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश की 96,000 से अधिक आंगनवाड़ियों में 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों, गभर्वती, धात्री माताओं, किशोरी बालिकाओं को (टीएचआर) पोषण आहार स्व सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादित करवाकर वितरित कराने का निर्णय लिया गया।प्रदेश में आजीविका मिशन एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा तेजस्विनी योजना अन्तर्गत स्व-सहायता समूहों की संख्या लगभग दो लाख से अधिक है। आज के निर्णय से इन समूहों के सहकारी संघों के माध्यम से पूरे प्रदेश में सात संयंत्रों की स्थापना की जावेगी। जहां पर टीएचआर का उत्पादन होगा। जिसका वितरण स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आंगनवाडियों तक किया जावेगा। संयंत्रों की स्थापना के लिये भूमि का आवंटन मुफ्त में किया जावेगा। संयंत्रों के भवनों का निर्माण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की राशि से किया जावेगा।

संघ संयंत्रों की स्थापना हेतु शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ऋण प्राप्त कर सकेंगे एवं इन ऋणों की गारंटी राज्य शासन द्वारा ली जावेगी। साथ ही इन समूहों को सफल बनाने के लिये उन्हें प्रशिक्षित करने, प्रबंधकीय सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है। पोषण आहार वितरण से होने वाली आय का वितरण इन समूहों को होगा जिससे वे और अधिक आर्थिक गतिविधियां कर सकेंगे।

प्रदेश में पोषण की व्यवस्था को सुदृढ करने के लिये आज यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रति दिवस पोषण आहार प्रदाय के लिये दी जाने वाली राशि में भी बढोत्री की जाये। निर्णयानुसार भारत सरकार के प्रावधानों को दृष्टिगत रखते हुए आंगनवाडियों में 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को रुपये छः प्रति दिवस के स्थान पर रुपये आठ प्रति दिवस, अतिकुपोषित बच्चों को रुपये नौ के स्थान पर बारह रुपये प्रति दिवस की लागत का पोषण आहार प्रदान किया जायेगा। गर्भवती, धात्री माताओं को रुपये सात के स्थान पर नौ रुपये पचास पैसे प्रतिदिवस एवं किशोरी बालिकाओं को पांच रुपये प्रतिदिवस के स्थान पर नौ रुपये पचास पैसे प्रतिदिवस की लागत का पोषण आहार प्रदाय करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश पर लगभग 400 करोड रुपये से अधिक प्रतिवर्ष अतिरिक्त भार आयेगा।

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