हमारे समय में परिस्थितियाँ बदलती रहती है। बदली हुई परिस्थितियों में चुनौतियाँ आती रहती है। उन चुनौतियों के समाधान को लेकर हम प्रेमचंद या किसी और रचनाकार के साहित्य के माध्यम से साहित्य या सामाजिक शोध को अपनाते है। किसी भी शोध के लिये बेहतर, सम्यक एवं सही दृष्टि का होना बहुत जरूरी होता है। जब हम प्रेमचंद के साहित्य पर शोध करते है तो पाते है कि हमारे समाज में प्रेमचन्द की रचनाओं में आये तमाम किरदार– होरी, धनिया, गोबर, रुकमणी, मालती आदि अभी भी जिन्दा है। यह विचार डॉ, राजीव रंजन गिरि, वरिष्ठ साहित्यकार एवं सह-प्राध्यापक, राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा व्यक्त किये गए।
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