“समाधान एक दिन” की अब हर माह समीक्षा होगी

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिये हैं कि प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लायी जाये। भावांतर भुगतान योजना में अगले एक सप्ताह में सभी किसानों को भुगतान सुनिश्चित किया जाये। समाधान एक दिन योजना की अब हर माह समीक्षा की जायेगी। सुशासन के इस बड़े कदम के अमल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। यह योजना प्रदेश के सभी लोकसेवा केन्द्रों में गत 7 मार्च से लागू हो गई है। मुख्यमंत्री आज यहां समाधान ऑनलाइन में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अब वे प्रतिदिन सीएम डेशबोर्ड पर महत्वपूर्ण योजनाओं और निर्देशों पर की गई कार्रवाई की प्रगति देखेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के डेढ़ करोड़ असंगठित मजदूरों के कल्याण के लिये महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू कर रही है। आगामी एक अप्रैल से पंद्रह मई तक असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जायेगा। इन श्रमिकों को पट्टा, आवास, नि:शुल्क चिकित्सा, शिक्षा, पोषण आहार, स्व-रोजगार, उज्जवला योजना के लाभ, बिजली के 200 रुपये प्रति माह फ्लेट बिल सहित अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करवायी जायेगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से गरीब मजदूरों के लिये व्यापक सुरक्षा चक्र बनाया जा रहा है। सभी कलेक्टर जिलों में पंजीयन के लिये व्यापक और व्यवस्थित कार्रवाई करें। राज्य सरकार ने गरीब कल्याण कोष भी स्थापित किया है। आगामी अप्रैल और मई माह में सभी जिलों में पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने के लिये गरीब मजदूर मेले लगाये जायेंगे। पेयजल आपूर्ति की आपात योजना बनायें मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-रोजगार की विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों के सम्मेलन कर उन्हें लाभ दिलाया जायेगा। गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन का कार्य आगामी पंद्रह अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। सभी पात्र किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करवाया जाये। पंजीकृत किसानों के खाते में मुख्यमंत्री समृद्धि योजना के तहत समर्थन मूल्य के अलावा 265 रुपये प्रति क्विंटल की राशि जमा करवायी जायेगी। भावांतर भुगतान योजना में चना, मसूर, सरसों और प्याज को भी शामिल किया गया है। इन फसलों के सभी किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करायें। चरण पादुका योजना में तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूता-चप्पल और पीने के पानी की कुप्पी वितरित की जायेगी। यह कार्यक्रम पंद्रह जिलों में किया जायेगा। इसकी व्यवस्थित तैयारियाँ करें। गर्मियों में पेयजल आपूर्ति के लिये सभी जिलों में आपात योजना बनायी जाये। इस संबंध में अग्रिम और विस्तृत तैयारी करें। आवश्यकता पड़ने पर पेयजल परिवहन कर उपलब्ध करवायें।

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