मध्य प्रदेश कांग्रेस में युवा नेतृत्व को मजबूत करने के नाम पर वरिष्ठ नेताओं को दूध में मक्खी की तरह अलग करने की रणनीति दिखाई दे रही है। चाहे संगठन सृजन कार्यक्रम हो या जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग का प्रोग्राम, वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ लेने के बजाय उन्हें कार्यक्रमों से दूर रखने की कोशिशें रही हैं। राहुल गांधी के मध्य प्रदेश प्रोग्राम में ऐसे नेताओं को भनक तक नहीं लगी है। पढ़िये विशेष रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश में 2023 में पार्टी मिली हार के बाद हाईकमान ने प्रदेश में युवा नेतृत्व को कमान सौंपने के रणनीति अपनाई थी और उसी कड़ी में विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्री जीतू पटवारी को पीसीसी का मुखिया बनाकर भेजा। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व उप नेता के रूप में दिग्गज नेताओं के विधानसभा सदस्य चुने जाने के बाद बावजूद दो युवा नेताओं उमंग सिंगार व हेमंत कटारे को चुना। हाईकमान के युवा नेतृत्व को कमान सौंपे जाने के बाद संगठन में भी दिग्गज नेताओं को असर को कम करने की निरंतर कोशिशों को हाईकमान ने नजरअंदाज करते हुए जीतू पटवारी को खुली छूट दी। कई मर्तबा हाईकमान ने अप्रत्यक्ष रूप से वरिष्ठ नेताओं को पीसीसी के फैसलों का विरोध नहीं करने की नसीहत भी दी।
राहुल से दूर रखा वरिष्ठों को
प्रदेश कांग्रेस ने जिस तरह राहुल गांधी के संगठन सृजन कार्यक्रम में वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप को करने की रणनीति पर काम किया था, वहीं अब उसमें बनाए गए जिला अध्यक्षों के ट्रेनिंग प्रोग्राम से भी उन्हें रखा गया। यही नहीं इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने आए राहुल गांधी से भी उन नेताओं को दूर रखकर साफ संकेत दे दिया गया कि अब उनकी जगह दूसरी पीढ़ी ताकतवर हो गई है। हालांकि कांग्रेस में पीढ़ियों के नेतृत्व परिवर्तन में कुछ विरोध होता रहा है मगर यह विरोध अब तक केंद्रीय संगठन में दिखाई देता था और प्रदेश इकाइयों में यह हाईकमान की तीसरी आंख के डर से नहीं होता था। इस बार यह मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही शुरू हुआ था जो अब भी कभी न कभी नजर आ जाता है। इसकी वजह नेतृत्व परिवर्तन में युवा नेतृत्व संभालने वाले नेताओं की कार्यप्रणाली भी है जिसमें युवा नेतृत्व के वरिष्ठों के साथ संवाद में कमी और उन्हें फैसलों में साथ रखने की कोशिश की कमी प्रमुख कारण है। जिला अध्यक्षों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में वरिष्ठों को जानकारी तक नहीं होने या राहुल गांधी के दो दिन के प्रवास में उनके लिए कुछ मिनिट भी रिजर्व नहीं रखने की रणनीति प्रदेश में कांग्रेस संगठन को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचाएगी और इसका असर बिहार के चुनाव के बाद नजर आएगा जिसमें कांग्रेस के मनचाहे परिणाम नहीं आने पर ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
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