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कांग्रेस में जाने वाले नेताओं को कचरा कहकर रोकने से परहेज या फैसले में विलंब
मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेताओं का भाजपा में जाने का सिलसिला लोकसभा चुनाव के पहले दौर के मतदान की तारीख नजदीक आने के बाद भी थम नहीं रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिपरिया में आयोजित जनसभा में रविवार को कांग्रेस की पहचान रहे मूंछों वाले हजारीलाल रघुवंशी के पुत्र पूर्व विधायक ओम रघुवंशी भी भाजपा में चले गए हैं। कांग्रेस से हो रहे दलबदल का कारण पार्टी में जानने के लिए अभी तक किसी प्रकार की रणनीति दिखाई नहीं रही है। पढ़िये रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जबरदस्त हार के बाद पार्टी से भाजपा में जाने वाले नेताओं का क्रम प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद तेजी से हुआ है। जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से फैसलों में कहीं न कहीं देरी हो रही है जिसको लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई देने लगी है। नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन में अब तक कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका है जिससे जिम्मेदारी चाहने वाले नेता बिना काम के भटक रहे हैं। विधानसभा चुनाव के पहले और चुनाव के दौरान जिन नेताओं के खिलाफ पार्टी ने एक्शन लिया था, अब तक उनसे चर्चा के लिए न तो किसी को जिम्मेदारी दी गई है और न ही कोई ऐसी कमेटी बनाई गई है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को जिलों में संगठन की कमी का अहसास हो रहा है और जनाधार वाले नेता पार्टी में तव्वजोह नहीं मिलने से दलबदल करते जा रहे हैं।
पार्टी से बाहर लोगों पर फैसले नहीं
विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान गड़बड़ियों के आरोप लगे थे जिसके कारण कई नेता पार्टी के फैसलों को गलत साबित करने के लिए चुनाव मैदान में उतर गए थे। इससे पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था जिनमें पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह ने तो खुलकर कमलनाथ को सबक सिखाने की चुनौती देते हुए चुनाव लड़ा था। इसी तरह हजारीलाल रघुवंशी के पूर्व विधायक पुत्र ओम रघुवंशी, पूर्व विधायक शेखर चौधरी, पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार भी चुनाव लड़े थे तो भोपाल से नासिर इस्लाम, आमिर अकील, आलोट से पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, धार से कुलदीप बुंदेला, बालाघाट से अजय विशाल बिसेन, मुडवारा से संतोष शुक्ला, छतरपुर से ढीलमणि शुक्ला, चंदला से पुष्पेंद्र अहिरवार, महाराजपुर से अजय दौलत तिवारी, जतारा से आरआर बंसल, सुमावली से कुलदीप सिंह सिकरवार, श्योपुर से दुर्गेश नंदिनी भी मैदान में उतरे थे जिनकी वजह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के वोट प्रभावित हुए। पार्टी ने इन सभी नेताओं सहित 39 नेताओं को एकसाथ और कुछ नेताओं को इक्का-दुक्का कार्रवाई में निष्कासित कर दिया था और विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी इन नाराज जनाधार वाले नेताओं को अब तक पार्टी में वापस लेने के प्रयास नहीं हुए हैं। इसमें लगातार विलंब होने की वजह से अब तक इनमें से कई नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं।




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