मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने 13 साल की सरकारी नौकरी के बाद अचानक वीआरएस लेने का फैसला कर लिया है। सागर, बालाघाट, रतलाम जैसे जिलों में कप्तानी करने के बाद इन दिनों में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिवारी ने वीआरएस का आवेदन कर दिया है मगर इसे स्वीकार करने की प्रक्रिया अभी पूरी होने में समय लगेगा। तिवारी ने सरकारी अखिल भारतीय सेवा की नौकरी क्यों छोड़ी यह चर्चा का विषय बन गया है। पढ़िये रिपोर्ट।
अखिल भारतीय पुलिस सेवा के 2013 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी अभिषेक तिवारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का फैसला ले लिया है और उन्होंने नौकरी छोड़ने के लिए विधिवत रूप से आवेदन भी दे दिया है। इस आवेदन पर अभी फैसला होना बाकी है मगर तिवारी ने सरकारी नौकरी नहीं करने का फैसला कर लिया है। तिवारी अखिल भारतीय पुलिस सेवा में आने के पहले मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर चुके हैं और वहीं से सरकारी नौकरी में आए। अब सरकारी नौकरी छोड़कर क्या करेंगे यह चर्चा का विषय है।
नौकरी छोड़ने का निजी कारण, फिर तलाशे जा रहे अन्य कारण
अभिषेक तिवारी ने वर्दी वाले रुतबे की आईपीएस की नौकरी छोड़ी और इसके पीछे कारण निजी बताए जा रहे हैं मगर यह कारण लोगों को हजम नहीं हो रहे हैं। नौकरी छोड़ने के पीछे अन्य कारणों को तलाशा जा रहा है। सरकारी नौकरी में हर तरह के दबाव से अधिकारी जूझते हैं और फील्ड पोस्टिंग में तो ये दबाव चारों तरफ से आते हैं। तिवारी को सागर एसपी रहते हुए जब 2024 में हटाया गया था तो उस समय वहां हुई दीवार गिरने की घटना में चार बच्चों की मौत को माना गया था। इस घटना के बाद जब उन्हें का तबादला हुआ तो वे दिल्ली केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए और तब से ही वे वहां पदस्थ हैं।
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