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प्रायवेट हॉस्पिटल की लूटः इंदौर के मेदांता में 21.53 लाख वसूली के लिए बनाया मरीज को बंधक, प्रशासन के हस्तक्षेप पर अकल्पनीय डिस्काउंट
मध्य प्रदेश में चिकित्सा के नाम पर बड़े-बड़े हॉस्पिटल में मरीजों और उनके परिजनों के साथ लूट जैसी स्थिति है। इंदौर में ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसमें बड़े हॉस्पिटल ग्रुप ने मरीज को एस्टीमेट से चार गुना बिल देने के बाद वसूली लिए न केवल उसे बंधक बनाया बल्कि लूट का खुलासा तब हो गया जब प्रशासन के हस्तक्षेप पर बिल की दो तिहाई राशि का डिस्काउंट दे दिया गया। पढ़िये रिपोर्ट।
जानकारी के मुताबिक मामला इंदौर के मेदांता हॉस्पिटल से जुड़ा है। यहां 76 वर्षीय अनिल कुमार सोनी हार्ट की प्रॉब्लम के कारण भर्ती हुए थे। वे 18 मार्च 2024 को मेदांता हॉस्पिटल में दाखिल हुए और वहीं उनकी ओपन हार्ट बायपास सर्जरी हुई। इसके लिए अस्पताल ने मरीज के परिजनों को पांच लाख का खर्च बताया जिसके लिए परिवारजनों ने किसी तरह साढ़े छह लाख रुपए यहां-वहां से एकत्रित किए और दो लाख मुख्यमंत्री सहायता कोष से अस्पताल को उपलब्ध करा दिए।
डिस्चार्ज के दिन 21.53 लाख का बिल थमाया
ओपन हार्ट बायपास सर्जरी का अस्पताल ने इलाज करने के बाद डिस्चार्ज करने के दिन 21 लाख 53 हजार रुपए का बिल सोनी परिवार के लोगों को थमा दिया तो वे घबरा गए। उन्होंने एस्टीमेट पांच लाख का दिए जाने की बात कही तो उन्होंने कुछ नहीं सुना और बिल के भुगतान होने के बाद ही मरीज को डिस्चार्ज करने का जवाब दिया। मरीज को अस्पताल से बाहर नहीं जाने दिया। जब यह बात सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंची तो अस्पताल प्रबंधन से प्रशासन ने संपर्क किया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद 21 लाख 53 हजार रुपए के बिल में से करीब दो तिहाई राशि का डिस्काउंट देते हुए मरीज को डिस्चार्ज किया। इस तरह 21 लाख 53 हजार रुपए में परिवार द्वारा छह लाख 52 हजार का भुगतान किया और दो लाख मुख्यमंत्री सहायता कोष से अस्पताल को मिले। इस तरह अकल्पनीय रूप से 13 लाख 36 हजार रुपए से ज्यादा का डिस्काउंट अस्पताल प्रबंधन ने किया। इस डिस्काउंट से प्रायवेट चिकित्सा संस्थानों की लूट का अंदाज लगाया जा सकता है।
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