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कांग्रेस में बड़े नेताओं के मैदान छोड़ने से लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों की लिस्ट अधर में
लोकसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेताओं के मैदान छोड़ने की चर्चाओं के बीच अब तक 18 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान नहीं हो पाया है जबकि इनमें से तीन सीटों शहडोल, जबलपुर और बालाघाट में तो नामांकन पर्चे दाखिल होने का सिलसिला बुधवार से शुरू भी हो चुका है। पढ़िये रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 18 लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों पर अब तक फैसला नहीं हो सका है जिनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित गुना, विदिशा, खजुराहो जैसी प्रमुख सीटें भी हैं। भाजपा ने जहां अपने वरिष्ठों केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीडी शर्मा, शिवराज सिंह चौहान, फग्गन सिंह कुलस्ते, वीरेंद्र खटीक जैसे नेताओं को चुनाव मैदान में उतार दिया है तो कांग्रेस हाईकमान की इच्छा के बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के चुनाव मैदान से भागने की चर्चा आम हो गई है।
वरिष्ठों को प्रत्याशी बनाए जाने की कार्यकर्ता की चाह
कांग्रेस पार्टी में नेता-कार्यकर्ताओं मं यह चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को वरिष्ठ नेताओं को उतारना चाहिए जिससे भाजपा को खुला मैदान नहीं मिल सके। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व दिग्विजय सिंह से लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह व डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्रीद्वय अरुण यादव व कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री तरुण भनोत, पीसी शर्मा, बाला बच्चन, प्रियव्रत सिंह, जयवर्धन सिंह, सज्जन सिंह वर्मा को लोकसभा चुनाव मैदान में उतारे जाने की चर्चा कार्यकर्ताओं के बीच है। कार्यकर्ताओं की मंशा है कि भाजपा के प्रदेश के 29 सीटों पर जीत के दावों को चुनौती देने के लिए इन सभी नेताओं को प्रत्याशी बनाया जाना चाहिए।
18 सीटों पर इन नेताओं के नाम की चर्चा
कांग्रेस को 18 प्रत्याशियों के नाम को फाइनल करना है लेकिन मंगलवार को चुनाव समिति की बैठक में कोई चर्चा ही नहीं हो सकी। वैसे भोपाल से कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ रहे ग्रामीण भोपाल के अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है जबकि पहले पीसी शर्मा-कैलाश मिश्रा का नाम यहां आगे था। मिश्रा तो सुरेश पचौरी के साथ भाजपा में चले गए हैं और पीसी शर्मा लोकसभा चुनाव से भाग रहे हैं। इंदौर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के अलावा अक्षय कांति बम-सत्यनारायण पटेल के नाम शामिल हैं। वहीं, गुना से दिग्विजय सिंह-जयवर्धन सिंह का नाम चर्चा में था लेकिन अब विधानसभा चुनाव के पहले बड़े काफिले के साथ कांग्रेस ज्वाइन करने वाले यादवेंद्र सिंह यादव का नाम आगे कर दिया गया है। दिग्विजय सिंह और प्रियव्रत सिंह का नाम राजगढ़ सीट पर चर्चा में है तो खंडवा से अरुण यादव का नाम आगे किया जा रहा है जबकि उन्होंने आगे बढ़कर गुना से सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा को पूरी करने के लिए उनके शुभचिंतकों ने खंडवा से उनसे बेहतर प्रत्याशी दूसरा नहीं होने की बात कहना शुरू कर दी है। मुरैना-ग्वालियर में डॉ. गोविंद सिंह का नाम चर्चा है जबकि वे पहले मुरैना से चुनाव लड़ने की इच्छा रख रहे थे और भाजपा के शिवमंगल सिंह तोमर के प्रत्याशी बन जाने पर जातीय समीकरण गड़बड़ाने से वहां का मैदान छोड़ दिया है। ग्वालियर में पूर्व विधायक प्रवीण पाठक के नाम भी चर्चा है और ब्राह्मण वोट के गणित से वे यहां प्रत्याशी बनाए जा सकते हैं। जबलपुर में विवेक तन्खा जैसे वरिष्ठ नेता को फिर से मैदान में उतारे जाने की कार्यकर्ताओं की चाह लेकिन यहां पूर्व मंत्री तरुण भनोत या लखन घनघोरिया जैसे नेता के नाम की भी चर्चा है। दमोह से पूर्व मंत्री मुकेश नायक या राजा पटैरिया को उतारा जा सकता है लेकिन जातीय समीकरण के हिसाब से विधायक रामसिया भारती के नाम भी चर्चा है। रीवा से विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को लोकसभा का टिकट देकर कांग्रेस भाजपा को चुनौती दे सकती है। इसी तरह विदिशा से शिवराज सिंह चौहान के सामने निशंक जैन या प्रताप भानु शर्मा जैसे नेता को उतार सकती है।
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