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पचमढ़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम का असरः PCC चीफ पटवारी के Free हैंड पर ब्रेक, जिला प्रभारियों की छुट्टी
मध्य प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद नेता हाईकमान के इतने नजदीक मान लेता है या उससे ऊपर समझने लगता है कि जल्द ही दिल्ली उसे जमीन दिखा देती है। हार के बावजूद पीसीसी चीफ बनाए गए जीतू पटवारी ने कुछ दिनों संगठन में अपने स्तर पर नियुक्तियां शुरू कर दीं जिसको लेकर दिल्ली ने उनके फ्री हैंड पर ब्रेक लगाते हुए न केवल नियुक्तियों को निरस्त कर दिया बल्कि आगे के लिए चेतावनी भी दे डाली। दिल्ली के आदेश के बाद अब नेताओं की जो सफाई आ रही है, वह किसी नर्सरी पढ़ने वाले बच्चे का दिल बहलाने वाले जुमले से कम नहीं है। पढ़िये रिपोर्ट।
प्रदेश कांग्रेस ने पिछले दिनों जबलपुर शहर में रितेश गुप्ता, उज्जैन शहर में अजय राठौर, धार में परितोष सिंह, राजगढ़ में राधेश्याम सोमतिया और उमरिया में पुष्पराज सिंह की संगठन मंत्रियों के तौर पर नियुक्तियां की थीं। इन नियुक्तियों से संबंधित जिलों में जिला अध्यक्षों के कामकाज प्रभावित होने लगे थे और सूत्रों का कहना है कि जिला संगठनों के माध्यम से हाईकमान तक यह बात पहुंची। इसके बाद गुरुवार 27 नवंबर को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने जीतू पटवारी को सीधे एक पत्र लिखकर संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों को एकतरफा निरस्त करते हुए आगे के लिए यह हिदायत दी कि कोई भी नियुक्ति के लिए पहले उनके समक्ष प्रस्ताव पेश किया जाए। सहमति के बाद ही नियुक्तियां की जाएंगी।
दो साल में फ्री हैंड पर इसलिए लगा ब्रेक
मध्य प्रदेश कांग्रेस में दो साल पहले जब पार्टी को विधानसभा चुनाव में हार मिली थी और उसके बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ था तो युवाओं के हाथों में कमान सौंपे जाते वक्त यह कहा गया था उन्हें फ्री हैंड है। हाईकमान ने कई बार ऐसे संकेत भी दिए जिससे प्रदेश नेतृत्व ने कई स्तर पर कभी ताकतवर रहे नेताओं को आंख दिखाने जैसे काम भी किए। प्रदेश नेतृत्व ने अपने समकक्ष नेताओं की लाइन को कम करने के कुछ फैसले भी किए जिसमें पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को संगठन प्रभारी बनाए जाने के बाद भी कक्ष तक नहीं दिया और फिर संगठन प्रभार से ही मुक्त कर दिया। इसके बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बना दिया। इसी तरह नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार से भी प्रदेश संगठन से दूरियों को लेकर कुछ ही महीने में सुर्खियां बनने लगीं। संगठन सृजन कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोप लगे और जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों पर सवाल भी खड़े हुए मगर दिल्ली ने उन पर विशेष ध्यान नहीं दिया। पचमढ़ी में प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल कहा गया मगर उसका असर फ्री हैंड पर ब्रेक के रूप में दिखाई दे गया है।
पचमढ़ी में जिला अध्यक्षों की हाईकमान से नजदीकी
कहा जा रहा है कि पचमढ़ी में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की हाईकमान के साथ बैठकें, पारिवारिक फोटो सेशन से पार्टी के भीतर चलने वाले सकारात्मक-नकारात्मक घटनाक्रम की सूचनाएं दिल्ली पहुंचने लगी हैं। संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों से जिला इकाइयों के कामकाज पर अवरोध पैदा होने जैसी परिस्थितियां बनी तो हाईकमान के आसपास इसकी सूचना पहुंची। नियुक्तियों को लेकर पूछताछ होने पर उनके सीधे आदेश जारी होने की बात सामने आने पर प्रदेश प्रभारी को सख्त आदेशात्मक नियुक्ति निरस्तीकरण पत्र जीतू पटवारी को सीधे लिखा गया।
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