Ground reality, गंदे नालों में डूबी drinking water पाइप लाइनें, शुद्ध पानी कैसे मिले….

मध्य प्रदेश का इंदौर ही नहीं, भोपाल हो या अन्य शहर, वहां पीने के पानी की पाइप लाइनों को बिछाते समय जमीनी स्तर पर काम का निरीक्षण नहीं होता और पाइप लाइन गंदे नाले व नालियों के भीतर से निकाल दी जाती हैं। नई पाइप लाइन तो गंदे पानी में भी लोगों को अच्छा पीने लायक पानी पहुंचा देती है मगर जब एक दो बार लीकेज होता है तो गंदे नाले और नाली की गंदगी पीने के पाइप लाइन में पहुंच जाती है। ऐसे में इंदौर के भागीरथपुरा से हादसे हो जाते हैं जिनकी गूंज दूसरे किसी बड़ी घटना के होने तक ही जिम्मेदारों को सुनाई देती है और फिर पुराने ढर्रे पर जिम्मेदार चलने लगते हैं। पढ़िये रिपोर्ट।

शहरों में पीने के पानी की पाइप लाइनों का जाल बस्तियों में जरूरत के मुताबिक बिछाए जाते रहे हैं और पुराने शहरी इलाकों में ऐसी पाइप लाइनों के बड़े हिस्से ऐसी गंदी नालियों और नालों के सहारे बिछते हैं जिनमें बस्तियों की गंदगी बहती रहती है। पाइप लाइनों को बिछाने के बाद नगरीय निकायों द्वारा उनकी देखरेख के लिए कोई निर्धारित मापदंड नहीं होते हैं जिससे पाइप लाइनें सड़ और गल भी जाती हैं। कई बार तो लीकेज होने पर उन्हें बंद करने में निकायों के अमले द्वारा इतना ज्यादा समय लिया जाता है कि नाले और नालियों की गंदगी पीने के पाइप लाइनों में चली जाती है। लीकेज बंद होने पर गंदगी पानी की सप्लाई के साथ घरों में पहुंच जाती है और फिर दूषित पानी पीकर लोग बीमार होते हैं। कई बार पीड़ित परिवार इस तरफ ध्यान नहीं देते तो कई बार दूषित पानी की शिकायतें करने के बाद भी निकायों के अमले द्वारा उन्हें नजरअंदाज किया जाता है।
भोपाल में उत्तर, मध्य व नरेला में यह समस्या
इंदौर की भांति भोपाल में दूषित पीने के पानी की समस्या पुराने शहर के कई इलाकों में हैं तो नए शहर में विकसित हुई या हो रही कॉलोनियों में व्यवस्थित विकास की वजह से यह समस्या कम है। भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य और नरेला विधानसभा क्षेत्र में दूषित पानी लोग आए दिन पीने को मजबूर होते हैं। यह समस्या बारिश के दिनों में ज्यादा होती है। जोन नंबर 17 की एक पाइप लाइन के सामने खड़े होकर कांग्रेस नेताओं ने वीडियो बनाया और फोटो खींचकर जिम्मेदारों को चेतावनी दी है कि अगर समस्या का निदान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
सवाल पूछने पर नेताओं को गुस्सा आता है
यह कहा जाए कि नगरीय निकायों द्वारा शहरी इलाकों में मानव जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि इंदौर के भागीरथपुरा जैसी घटना पर राजनेताओं से सवाल किए जाते हैं तो उन्हें गुस्सा आता है। 20 लोगों की जान जाने के बाद भी नेता सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल करने वालों को अमर्यादित भाषा में जवाब देते हैं और उनके समर्थक अपने नेता से सवाल करने वालों को धमकाते हैं। वहीं, जिम्मेदारों के गठजोड़ के संदेह पर सवाल करने पर विपक्षी दल के नेता भी सत्ताधारी दल के नेताओं की तरह धमकाते हैं। वे सवालों को व्यक्तिगत मान सम्मान का मुद्दा बनाते हैं। जबकि यह होना चाहिए कि निकायों के जिम्मेदारों पर व्यवस्था में सुधार के लिए दबाव बनाकर काम करना चाहिए।
शहर में ये हाल, गांव में जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार
साफ शुद्ध पानी देने के लिए शहरों के लिए अब तक लाई गई विभिन्न परियोजनाओं के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र जल जीवन मिशन चला रहा है जिसमें हर घर में नल से शुद्ध पानी देने की बात कही जा रही है। मगर इस जल जीवन मिशन की हालत यह है कि उसके ठेकेदारों व सरकारी एजेंसियों के जिम्मेदारों के बीच कमीशन का ऐसा बंटवारा है कि उसके तहत होने वाले काम शहर की पीने की पाइप लाइन से भी बुरे होने वाले है जो आने वाला समय बताएगा।

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