लोकसभा चुनाव के परिणाम देश में जहां इंडिया गठबंधन के लिए सुखद अहसास करने वाले रहे वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा ने क्लीनस्वीप कर कांग्रेस से एकमात्र छिंदवाड़ा सीट को भी छीन लिया है। पूरे चुनाव में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अपने कार्यालय के वास्तुदोष दूर करने में जुटी रही थी और परिणाम के दिन प्रदेश अध्यक्ष अपनी निर्धारित कुर्सी की दिशा बदलकर भी बैठे मगर ये उपाय भी पार्टी को लोकसभा चुनाव में जीत का मंत्र नहीं दे सके। नौ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर सबसे कम रहा तो भाजपा का सबसे ज्यादा हुआ है। पढ़िये रिपोर्ट।
लोकसभा चुनाव ने इस बार सभी राजनीतिक दलों को खुशियां मनाने का मौका दिया है लेकिन मध्य प्रदेश में भाजपा जहां क्लीनस्वीप करके खुशियां मना रही है तो कांग्रेस में बड़े नेताओं की हारने की खुशी दूसरी लाइन के नेता-कार्यकर्ता अंतर्मन में मना रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस बार हाईकमान ने युवा नेतृत्व को मौका देने के लिए जो मौका दिया था, वह उनके लिए चुनौती थी। राजगढ़ में दिग्विजय सिंह का चुनाव हो या छिंदवाड़ा में कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को दूसरी बार मौका दिए जाने का मामला, दोनों ही नेता युवा नेतृत्व के लिए चुनौती थे और इस चुनाव में राजगढ़-छिंदवाड़ा की जीत से दोनों बुजुर्ग नेताओं को संजीवनी मिल सकती थी जो हार से नहीं मिल सकी है।
वास्तुदोष दूर करने से भी नहीं बदले दिन हाईकमान ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद जिस उम्मीद के साथ युवा नेतृत्व को कमान सौंपी थी, उसने लोकसभा चुनाव जैसे लोकतंत्र के महापर्व में संगठन को सक्रिय करने के बजाय प्रदेश कार्यालय के वास्तुदोष को दूर करने में पूरी ऊर्जा लगा दी थी। इंदिरा भवन में दो महीने से जिस तरह तोड़-फोड़, रंगाई-पुताई और घिसाई चल रही थी, मानो सभी वास्तुदोष दूर हो जाएंगे। आज जब चुनाव परिणाम आने वाले थे तो पीसीसी चीफ के कक्ष में मुखिया की कुर्सी की दिशा बदलकर पहली बार उस पर जब वे बैठे तो न तो दिशा परिवर्तन का असर चुनाव परिणामों में नजर आया और न ही वास्तुदोष दूर करने के अन्य उपायों का सकारात्मक पक्ष परिणाम आया। बल्कि जिस एकमात्र सीट से कांग्रेस की लाज 2019 में बची थी, वह भी भाजपा के खाते में चली गई।
1991 से अब तक वोट शेयर में भी भाजपा आगे मध्य प्रदेश के लिहाज से लोकसभा चुनाव में वोट शेयर के मामले भी भाजपा को कांग्रेस से बढ़त ही मिली है। 1991 के बाद से अब तक हुए नौ लोकसभा चुनाव में भाजपा का सबसे ज्यादा वोट शेयर इस बार 59.27 फीसदी रहा है जो कि उसे इसके पहले 2019 में मिले उस समय तक के सबसे ज्यादा 58 फीसदी से 1.27 फीसदी अधिक है। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 1991 से अब तक हुए इन चुनाव में 32.44 फीसदी वोट शेयर दूसरा सबसे कम है। 2024 के पहले 1996 में कांग्रेस का 31.02 फीसदी वोट शेयर रहा था। यानी वास्तुदोष दूर करने या पीसीसी चीफ की कुर्सी की दिशा बदलने जैसे उपाय से कांग्रेस को न तो सीटें मिलीं और न ही उसके प्राप्त मतों में कोई इजाफा हुआ है।
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