Digvijay singh ने कहा neither tired nor retiring दोहराया राजनीति से सन्यास नहीं लेंगे

रवींद्र कैलासिया

राज्यसभा सदस्य और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने राज्यसभा कार्यकाल के पूरे होने के बाद सन्यास की चर्चाओं के बीच फिर अपनी आगामी कार्ययोजना के बारे में बताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी के रिटायरमेंट को लेकर दिए गए वक्तव्य को बताते हुए अपने सन्यास को लेकर मीडिया को कुछ ऐसा कहा जिससे उनके राजनीति छोड़ने की अटकलों को जोर देने वालों को जवाब मिल गया। पढ़िये रिपोर्ट।

दिग्विजय सिंह ने संसद के बजट सत्र के अवकाश के बाद सोमवार से शुरू हो रहे शेष सत्र के पूर्व भोपाल में अपने सरकारी निवास पर मीडिया के सामने अपने सन्यास की अटकलों पर सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। सिंह के सन्यास की चर्चाओं को सोशल मीडिया पर उनकी एक पोस्ट से हवा मिली थी जिसमें उन्होंने एक बैंक अधिकारी के रिटायरमेंट के बाद देश भ्रमण पर निकलने को शेयर किया था। मगर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे पहले ही कह चुके हैं कि दो बार राज्यसभा सदस्य बनने के बाद तीसरी बार उनकी इच्छा नहीं है।
सन्यास पर अटलजी का वक्तव्य बताया
सिंह ने अपने सन्यास पर जहां सधे हुए अंदाज में जवाब दिया तो वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी के वक्तव्य को भी बताया। उन्होंने कहा कि बाजपेयीजी कहा करते थे न थके हैं न रिटायर हुए हैं। सिंह ने चुनावी राजनीति से दूर रहने के सवाल पर कहा कि वे लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा तीनों सदन के सदस्य रह चुके हैं तो अब कांग्रेस पार्टी के संगठन के लिए काम करेंगे। पार्टी नेतृत्व जो भी उन्हें जिम्मेदारी सौंपेगा वह उसे निभाएंगे।
प्रदेश के चावल के जीआई टैग नहीं मिलने पर सवाल उठाए
सिंह ने प्रदेश के चावल को जीआई टैग नहीं मिलने पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश के दो वरिष्ठ नेता केंद्र में कृषि मंत्री रहे। इसके बाद भी प्रदेश के चावल उत्पादक किसानों को जीआई टैग नहीं मिलने से हो रहे नुकसान की चिंता नहीं की गई। सिंह ने कहा कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र के किसान भी चावल उत्पादन कर रहे हैं मगर उन्हें जीआई टैग नहीं मिलने से लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के 48 जिलों के चावल उत्पादक किसानों को जीआई टैग दिया गया है और मध्य प्रदेश के 13 जिलों के किसान को इससे वंचित रखा जा रहा है। इस संबंध में वे एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक बार मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिख चुके हैं और सात मार्च को फिर पीएम मोदी को पत्र लिखकर मप्र के चावल उत्पादक किसानों की परेशानी को रख चुके हैं। अब सोमवार से शुरू हो रहे संसद के सत्र में वे फिर इस मुद्दे को उठाएंगे।

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