मध्य प्रदेश में इन दिनों जहां कानून को हाथ में लेकर वर्दीधारी और उनके रिश्तेदारों के अलावा अन्य लोग सड़क पर सरेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं। वहीं, सरकार की छवि को निखारकर जनता के सामने पहुंचाने की भूमिका निभाने वाले जनसंपर्क विभाग बागी हो गया है क्योंकि विभाग में राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर को भेज दिया गया। हालांकि सरकार के इस आदेश के खिलाफ विभाग सड़क पर उतर आया है और कोई काम नहीं किया। पुलिस और जनसंपर्क दोनों ही विभाग मुख्यमंत्री के पास हैं जिनकी वजह से जनसामान्य में डर-भर का माहौल है तो जनसंपर्क विभाग बाहरी अफसरों को थोंपा जा रहा है। हालांकि जनसंपर्क अधिकारी-कर्मचारियों ने देर रात को आश्वासन के बाद काम पर लौटने का फैसला भी ले लिया। इन विभागों से जुड़ी घटनाओं पर एक विशेष रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पास जिन विभागों का जिम्मा है, उसमें मुख्यमंत्री के पास गृह और जनसंपर्क विभाग हैं। इन दिनों प्रदेश की जनता सरेआम हो रही गुंडागर्दी की घटनाओं से परेशान हो चुकी है। वर्दीधारी हो या उनके रिश्तेदार या अन्य असरदार लोग, सड़क पर गुंडागर्दी कर रहे हैं और कानून को हाथ में लेकर लाठी-डंडे चला रहे हैं। रायसेन जिले में करीब एक सप्ताह से मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद लोग सड़कों पर उत्पात मचाकर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं और सड़क पर लंबी दूरी का सफर करने वाले परेशान हो रहे हैं। मगर विरोध का ऐसा तरीका अपनाने वालों को किसी का डर नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस मामले में कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुध ली और देर शाम पुलिस मुख्यालय में पहुंचकर अफसरों के साथ बैठक की। बैठक में कुछ अफसरों का तबादला कर संदेश देने की कोशिश की गई मगर संभवतः यह संदेश उत्पात करने वाले पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों व अन्य लोगों तक पहुंचा ही नहीं है।
कानून व्यवस्था से जुड़े गृह विभाग के अलावा सीएम के दूसरे विभाग जनसंपर्क में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यहां ऐसे माहौल में विभाग काम कर रहा था जहां कई महीने से संचालक ही नहीं है। दो साल की अवधि में तीन आयुक्त बदल चुके हैं और संचालक भी तीन बदल गए हैं। कई महीने से संचालक नहीं है। बुधवार को मंत्रालय ने राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी गणेश जायसवाल को अपर संचालक के रूप में जनसंपर्क संचालनालय में पदस्थ कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। संचालनालय के अधिकारी पहले ही संचालक पद कैडर पोस्ट करने के लिए कई सालों से मांग कर रहे थे और अपर संचालक पद ही कैडर के बाहर के अधिकारी की पदस्थापना ने उनकी नाराजगी में घी डाल दिया है। गुरुवार को संचालनालय के अधिकारी-कर्मचारी लामबंद होकर सड़क पर ही उतर आए और पूरे दिन काम नहीं किया। उनके विरोध को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग ने भी समर्थन कर दिया है। देखना यह है कि जनसंपर्क अधिकारी-कर्मचारी अपनी इस लड़ाई को कहां तक ले जाते हैं और सरकार उनके विरोध से कितने दबाव में आती है।
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