फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी

मध्य प्रदेश कांग्रेस में राजनीतिक परिस्थितियों को दरकिनार रखकर बेतुके फैसले लेने की एक परंपरा चली आ रही है जो इन दिनों दिल्ली में गरमाए राजनीतिक माहौल के बीच फिर से पीसीसी ने लिया है। केंद्रीय बजट के लिए बुलाए संसद के सत्र में कांग्रेस नेता राहुल गांधी जहां अपनी बात को सदन में नहीं रखने दिए जाने पर अड़े हैं तो वहीं लोकसभा में कांग्रेस के कुछ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। ऐसे में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी की बात को सभी प्रकार के मीडिया में पहुंचाने वाले प्रवक्ताओं की छुट्टी कर दी है। पढ़िये रिपोर्ट।

मध्य प्रदेश कांग्रेस पिछले कुछ सालों से अपने बेतुके फैसलों की वजह से लगातार संकट के दौर से जूझ रही है मगर उन फैसलों से सबक लेने के बजाय उसे संगठन द्वारा परंपरा का स्वरूप देने के प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में भाजपा की मोदी सरकार संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में अपनी बात को रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि लोकसभा में आसंदी से उन्हें बोलने की अनुमति तो दी गई मगर पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंश बोलने के प्रयास में उन्हें रोका गया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने व्यवस्था भी दी। लगातार दूसरे दिन यह मुद्दा उठाने की कोशिश और आसंदी पर पर्चे फेंकने की घटना पर कांग्रेस के कुछ सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों में जब मीडिया में पार्टी का मजबूती के साथ पक्ष रखने का समय है तो मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मीडिया विभाग के सभी प्रवक्ताओं की छुट्टी करने का आदेश जारी कर दिया। अब केवल मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक को सभी तरह के मीडिया में पार्टी की बात रखने के लिए अधिकृत कर दिया गया है।
पहले भी असामान्य राजनीतिक परिस्थितियों में हुए ऐसे फैसले
मध्य प्रदेश कांग्रेस में ऐसे फैसले कुछ सालों से आम बात हो गई है। जब विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली थी तो प्रदेश नेतृत्व को बदलने के लिए युवा नेता को मौका दिए जाने के नाम पर बदलाव किया गया था, जबकि उस समय लोकसभा चुनाव पर पार्टी को तैयारी करना चाहिए थी। उन परिस्थितियों में युवा नेतृत्व को कमान सौंपी गई और नतीजा सामने आया कि लोकसभा की सभी 29 सीटें पार्टी हार गई। इसी तरह कमलनाथ सरकार को जब प्रदेश की जनता ने सरकार चलाने के लिए चुना था तब भी पार्टी के नेताओं ने नाजुक परिस्थितियों में सख्त फैसले लेकर अपनी सरकार को कमजोर कर लिया था। कांग्रेस सवा साल भी सत्ता को नहीं संभाल पाई थी। अब एकबार फिर मध्य प्रदेश कांग्रेस में परिस्थितियों को नजरअंदाज करके प्रवक्ताओं को कार्यमुक्त कर दिया गया है। कहा गया है कि टैलेंट हंट प्रक्रिया पूरी होने तक मीडिया विभाग के अध्यक्ष नायक ही सबकुछ संभालेंगे।

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