कैलाश को क्यों आ रहा गुस्सा, कभी घंटा बोल भड़क रहे तो आदिवासी नेता को ही औकात समझा रहे…

भाजपा नेता और वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को इन दिनों बेहद गुस्सा आ रहा है। इंदौर में दूषित पानी से मौतों की घटना पर जब मीडिया ने सवाल किया तो पत्रकार पर घंटा जैसा अमर्यादित शब्द बोलकर भड़क गए तो अब नेता प्रतिपक्ष व आदिवासी नेता उमंग सिंघार को उसी मुद्दे पर औकात समझाने से नहीं चूके। कैलाश विजयवर्गीय के गुस्से के पीछे पार्टी के रणनीतिक फैसलों से नाराजगी को माना जा रहा है और विजयवर्गीय ही नहीं कुछ अन्य नेता इसी तरह आशंकित भाव से आने वाले समय का इंतजार कर रहे हैं। पढ़िये रिपोर्ट।

मध्य प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता पिछले करीब दो साल से अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे हैं लेकिन इसको लेकर वे खुलकर बोलने से बचते रहे हैं। आज भी ऐसे तमाम नेता बयान या अनौपचारिक चर्चा में भी नाराजगी का अहसास नहीं होने दे रहे हैं जिससे उनके मन के भीतर उथल-पुथल गुस्से के रूप में बाहर निकलती रहती है। कहा जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय का कुछ समय से बदला व्यवहार भी मन की भीतर आशंका के चलते मची उथल पुथल है। वरिष्ठता की वजह से मन की बात बाहर नहीं ला पा रहे हैं।
विजयवर्गीय मन की उथल पुथल को संभाल नहीं पा रहे थे कि उनके अपने गृह नगर इंदौर में दूषित पानी से मौतों की घटना हो गई। तब नगरीय प्रशासन मंत्री होने के नाते प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने के बाद भी मौतों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ी तो विपक्ष उनकी जिम्मेदारी तय करने की बात करने लगा। इस्तीफे की मांग करने लगा। विपक्ष ने न केवल घटना को लेकर जमीनीस्तर पर आंदोलन किए और मंत्री के इस्तीफे की मांग तो विधानसभा के भीतर भी अपने साथी विधायकों को लेकर हंगामा किया। जब कांग्रेस का हंगामा बढ़ा नेता प्रतिपक्ष सिंघार के साथ विजयवर्गीय की सीधी बहस होने लगी तो मंत्री ने सिंघार को अमर्यादित शब्द उपयोग कर सीमा में रहने की बात कही। सिंघार बाद में एक्स पर उन्हें बोले गए शब्द औकात में रहने को लेकर जमकर भड़के और इसे अपना नहीं प्रदेश की साढ़े सात करोड़ लोगों का अपमान बताया। गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर इंदौर में विजयवर्गीय ने एक वरिष्ठ पत्रकार के सवाल पूछने पर उसे घंटा कहकर संबोधित कर दिया था।
ऐसा नहीं है कि इस समय मध्य प्रदेश भाजपा में प्रदेश लेकर जिलों में भी नेता व कार्यकर्ता पद या जिम्मेदारी मिलने की बाटजोह रहे हैं जिसकी तैयारियों पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने टिप्पणी भी की थी। मगर जिन्हें दो साल बाद भी कुछ नहीं मिला है तो वे भी गुस्से में हैं। मंत्रिमंडल से हटाए जाने की तलवार जिस मंत्री विजय शाह तलवार लटकी है उनके मुंह से महिला सैन्य अफसर के लिए निकली टिप्पणी तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं दिखाई देती है। उस प्रतिक्रिया को असुरक्षा की भावना के पीछे दबे डर का प्रतीक भी बताया जा रहा है क्योंकि मोहन सरकार के मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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