परमाणु ऊर्जा के दिन पूरे- नेशनल एलायंस आफ़ एंटी-न्युक्लियर मूवमेंट्स

नेशलन एलायंस आफ़ एंटी-न्युक्लियर मूवमेंट्स की पहल पर पूरे देश में चल रहे तमाम परमाणु ऊर्जा विरोधी आंदोलनों का दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में 28 अक्टूबर 2018 को संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित प्रेस-वार्ता में इन सभी आंदोलनों ने एक स्वर में मध्य प्रदेश की चुटका परमाणु परियोजना समेत देश की सभी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने परमाणु संयंत्रों में हुई दुर्घटनाओं के भयावह दुष्प्रभावो से सबक लेने की अपील की। इन संगठनों ने यह भी कहा कि परमाणु खनिजों के खनन के दुष्परिणाम, संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए आदिवासियों के ज़मीनों पर अवैध कब्ज़े और उनकी आजीविका पर अमानवीय हमले अब सभी हदों को पार कर चुके हैं और देश की जनता अब इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते।

खुद बिजली मंत्रालय की दिसंबर 2016 की रपट के अनुसार, देश में बिजली उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता इस समय कुल अधिकतम माँग से दोगुनी है। इसके अलावा, पवन व सौर ऊर्जा की तुलना में परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने का भारी खर्च व उससे उत्पादित बिजली की प्रति यूनिट ऊँची कीमत विनाशकारी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की जरूरत पर भी सवालिया निशान खड़े करते हैं।

यह एक ज्ञात तथ्य है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र गैस और तरल पदार्थ के रूप में रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैलाते हैं – तब भी जब वे “सामान्य रूप से” काम कर रहे हों। भारत के उच्च जनसंख्या घनत्व को देखते हुए – वर्तमान परमाणु परियोजनाओं के आसपास भी – भारी रेडियोधर्मी एक्सपोजर के संभावित खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

ऐसे समय जब दुनिया के अधिकांश देश परमाणु ऊर्जा से किनारा कर रहे हैं,भारत सरकार का परमाणु ऊर्जा पर इतना जोर देना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता – पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा या आर्थिक समझदारी – किसी आधार पर नहीं।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, इन आंदोलनों व संगठनों की माँग है कि सभी राजनीतिक दल अवाम की इन मांगों को अपने घोषणापत्र में शामिल करें। उनकी अनदेखी देश की जनता की भावनाओं का अपमान होगा। इस सम्बन्ध में, हम मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के चुटका परमाणु संयंत्र के खिलाफ लिए गए सकारात्मक पक्ष का स्वागत करते हैं। हम अन्य सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि वे आगे आकर इस दिशा में सकारात्मक पहल लें।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने वाले आंदोलन समूह हैं: नेशनल एलायंस ऑफ़ एंटी-न्युक्लियर मूवमेंट्स (NAAM); ऑल-इंडिया पीपल्स इनिशियेटिव अगेंस्ट न्युक्लियर पॉवर (AIPANP); कोंकण विनाशकारी प्रकल्प विरोधी संघर्ष समिति, जैतापुर;जन हक्क सेवा समिति, जैतापुर; पीपल्स मूवमेंट अगेंस्ट न्युक्लियर एनर्जी, कुडनकुलम;फ़्रेंड्स ऑफ़ अर्थ, चेन्नई; परमाणु संयंत्र विरोधी संघर्ष समिति, गोरखपुर,हरियाणा; भारत जन विज्ञान जत्था, दिल्ली; चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति, मंडला, म.प्र.

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