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कांग्रेस की छानबीन समिति के सामने हंगामा, राजीव सिंह पर पक्षपात के आरोप
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दो दिन से एआईसीसी की छानबीन समिति विधानसभा चुनाव में जिताऊ प्रत्याशी की तलाश में एक-एक नेता से मिलकर जानने का प्रयास कर रही है लेकिन उनसे मिलाने की जिम्मेदारी संभालने वाले पीसीसी महामंत्री प्रशासन राजीव सिंह पर ही लोगों ने पक्षपात का आरोप लगा दिया। इससे यह हालात बने की छानबीन समिति के सामने ही हंगामा होने लगा और फिर समिति के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री ने हॉल से निकलकर मामला शांत कराया। बाद में मिस्त्री ने सामूहिक रूप से लोगों से मुलाकात की।छानबीन समिति के अध्यक्ष मिस्री के साथ दो सदस्य नेटा डिसूजा व अजय कुमार लल्लू शुक्रवार को भोपाल आए थे। इसके पहले समिति 13 जुलाई को भोपाल आए थे। दोनों ही दौरों में छानबीन समिति ने लोगों से बातचीत की और सवालों के माध्यम से विधानसभा क्षेत्रों के समीकरण और पार्टी की वहां मौजूदगी के बारे में मोटा-मोटा नक्शा तैयार किया है। हालांकि उनके पास पिछले दो विधानसभा चुनावों के रिकॉर्ड हैं जिनमें नेताओं की सिफारिशों व उन नामों की हार-जीत का पूरा कच्चा चिट्ठा है।
दो दिन में छानबीन समिति ने करीब 400 नेताओं से मुलाकात की। इनमें चुनाव समिति और सांसद-विधायक भी शामिल हैं। चुनाव समिति, सांसद-विधायकों ने अपने क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति के साथ अपने समर्थक दावेदारों की सिफारिश भी की। जिनकी सिफारिश की गई, उनके बारे में मिस्त्री ने नेताओं से पूरी जानकारी ली। जो नेता सीधे समिति से मिले, उनसे उनके विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की हार या जीत का रिकॉर्ड जाना। साथ ही दावेदारों का वजन आंकने के लिए उनसे उनके मतदान केंद्र तथा वार्ड में कांग्रेस को प्राप्त वोटों की जानकारी मांगी।
बागियों से बचने के लिए दावेदारों से शपथ पत्र भी मांगा गया है जिसमें टिकट नहीं मिलने पर बागी स्वर नहीं अपनाने का वचन लिया गया। इसके साथ ही उनसे न केवल निर्दलीय बल्कि दूसरे दल की सदस्यता लेकर भी कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में नहीं आने पर शपथ ली गई।




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