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ई-टेंडर से पिछले 4 साल में दिए टेंडरों की उच्चस्तरीय जांच हो
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सरकार पर चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मांग की है कि ई-टेंडरिंग से पिछले 4 साल में विभिन्न विभागों द्वारा दिए गए निर्माण कार्यों के टेंडर की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार ”खाओ और खाने दो” की नीति पर चल रही है। उन्होंने कहा कि किसान हितैषी और किसानपुत्र होने की बात करते हैं मुख्यमंत्री किन्तु प्रदेश का किसान जब परेशान था, आत्महत्या कर रहा था तब मुख्यमंत्री के लिए किसान सड़क निधि से लगभग 30 लाख की नई फॉरच्यूनर गाड़ी खरीदी। इसके लिए दलाल को दलाली देकर वीआईपी नंबर भी लिया गया। सिंह आज सच्चाई की बात जनता की अदालत के तीसरे दिन समापन उदबोधन में बोल रहे थे।व्यापम से भी बड़ा है ई-टेंडरिंग घोटाला – नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ई-टेंडर घोटाला मध्यप्रदेश के माथे पर व्यापम के बाद लगा एक और कलंक हैं। उन्होंने कहा कि सुनियोजित तरीके से चहेती कंपनियों को ऑनलाईन ई-टेंडर का ठेका दिया गया। इस विभाग का यह संयोग है कि जिस तरह व्यापम घोटाले के समय स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा के हटने के बाद मुख्यमंत्री उस विभाग के मंत्री बने ठीक उसी तरह आईटी विभाग में भी मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस टेंडर घोटाले का पर्दाफाश जब हुआ जब प्रतिद्वंदी कंपनी एलएनसीटी ने लगातार रिजनेवल रेट होने के बाद भी उनके टेंडर स्वीकृत न होने की सच्चाई का पता लगाया। श्री सिंह ने कहा कि ई-ऑनलाईन टेंडरिंग में टेम्परिंग की जा रही है। श्री सिंह ने सवाल किया कि यह एक अपराधिक कृत्य था तो आज तक संबंधितों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जिन आठ टेंडरों में टेम्परिंग हुई थी उन्हें आज तक रद्द नहीं किया गया। श्री सिंह ने जानकारी दी कि इस पूरे प्रकरण में जो एन्थ्रेक्स कंपनी का दफ्तर जो मानसरोवर में है संयोग है कि 11 और 12 नंबर की दुकान में इस प्रकरण के बाद आग लग गई। जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज जलना बताया है। श्री सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले की पूरे तथ्यों के साथ, डिटेल के साथ प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि इस पूरे घोटाले की असलियत सामने लाना चाहते हैं तो सरकार 9755092919 नंबर जो श्री विजय चौधरी का है पड़ताल करे तो सारी परते सामने आ जाएगी।
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग में प्लांट आवंटन में घोटाला – नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि एक ओर सरकार स्वरोजगार के लिए लघु सूक्ष्म और मध्यम उद्यमी को प्रोत्साहित करने का दावा करती है दूसरी ओर उनके साथ धोखाधड़ी और छल किया जाता है। उज्जैन जिले का उदाहरण है कि यहां के औद्योगिक क्षेत्र बांदका में रिक्त तीन भूखंडों के जिनके क्रमांक सी-45, 46 और 47 हैं, को आवंटित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। नियमानुसार यह विज्ञप्ति प्रक्रिया शुरू होने के सात दिन पहले समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाना चाहिए लेकिन 10 जनवरी 2018 से 17 जनवरी 2018 जो कि अंतिम तिथि थी के लिए विज्ञापन प्रकाशित करने की प्रक्रिया 6 जनवरी 2018 को शुरू हुई इधर 10 जनवरी 2018 से भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन जब उद्यमियों ने ऑनलाईन आवेदन करना चाहा तो पूरे प्रदेश के 204 प्लाट आवंटन की सूची में उज्जैन जिले का नाम प्रदर्शित ही नहीं हो रहा था।
अजय सिंह ने कहा कि भांवातर योजना को किसानों की हितैषी येाजना बताकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान झूठ बोल रहे थे इसका पर्दाफाश इन्कम टैक्स के उस नोटिस ने कर दिया जो प्रदेश के 42 व्यापारियों को दिया। जिसमें उन्होंने करोड़ों रूपए का खाद्यान्न खरीदा। इस संबध में मंडी बोर्ड के एमडी ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भी लिखा। जिसमें इस गड़बड़ी की ओर इंगित करते हुए उन्हें जांच करने को कहा लेकिन आज तक जांच नहीं की गई। जिससे यह पुष्टि होती है कि भावांतर योजना का लाभ किसानों को नहीं व्यापारियों को मिला जिसकी सांठगांठ भाजपा सरकार से है।
सिंह ने कहा कि पिछले 15 साल में भाजपा सरकार ने भूमाफिया ने बेशकीमती जमीन को औने-पौने दाम पर खरीदकर अरबों रूपए का चूना सरकार को लगाया है। इसका उदाहरण रीवा है। रीवा में समदड़िया और मंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने सांठगांठ कर शहर की बेशकीमती जमीन को हड़पा है।
बाला बच्चेन ने कहा कि 2013 में भी विधानसभा में भाजपा ने षडयंत्र रचकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने दी। यह इनका दोगला चरित्र है। इस सत्र में पहले दिन ही दैनिक कार्यसूची में शामिल विषयों को देखकर आभास हो गया था कि सत्तापक्ष सदन चलाने के मूड में नहीं है। स्पीकर ने एक रनर की भूमिका निभाई है उन्होंने तेजी से अनुपूरक एवं अन्य विधेयक पेश कर पास भी करा दिया। मुख्यमंत्री ने विधायक दल की बैठक में विधानसभा न चलने देने पर चर्चा की थी तथा उनके इशारे पर ही सदन नहीं चला। क्योंकि यदि सदन चलता तो चार साल के लंबित प्रश्नों के जवाब सदन में देने पड़ते। प्याज घोटाला, एनआरआई एडमिशन घोटाला, नर्मदा सेवा यात्रा के वृक्षारोपण घोटाला, मंडी घोटाला, मंदसौर गोलीकांड, पेटलावद कांड सहित 10 आयोगों की जांच की रिपोर्ट भी सदन में रखकर चर्चा करानी थी लेकिन पलायन कर इन सब मुद्दों से बचे रहे। व्यापम घोटाले में मुख्यमंत्री को जेल जाना पड़ेगा।
सुन्दरलाल तिवारी ने कहा कि गोली की दम पर भाजपा सरकार चल रही है उन्होंने कहा कि हर वो आवाज दबा और कुचल दी जाती है जो सरकार की नाकामयाबी और कारनामों को उजागर करती है। तिवारी ने कहा कि मंदसौर में एक मासूम बालिका के साथ हुई दुराचार की घटना से आंखे शर्म से झुक गई हैं। उधर बालिका आज जीवन-मृत्यु से संघर्ष कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि तत्काल उसे बेहतर ईलाज के लिए दिल्ली भेजें ताकि उसका जीवन बच सके।
महेन्द्र सिंह सिसौदिया ने कहा कि आज प्रदेश का हर व्यक्ति 20 हजार रूपए के कर्ज से लदा हुआ है। भावांतर योजना से किसानों को छला गया है। वह चार-पाच दिन तक अपनी मेहनत की उपज की तुलाई के लिए लाईन में खड़ा रहा है। उसकी बात सदन में न हो इसलिए सरकार ने विधानसभा के इतिहास में सबसे छोटा सत्र होने का कलंक अपने माथे पर लगाया।
सरस्वती सिंह ने कहा कि इस सरकार ने आदिवासियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आदिवासियों को विकास अवरूद्ध हो गया है। उन्होंने बताया कि आज अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में रह रहे लोग अंधेरे में जी रहे हैं क्योंकि बिजली नहीं, पेड़ के नीचे पढ़ रहे हैं क्योंकि भवन नहीं, पढ़ाई से वंचित हैं क्योंकि टीचर नहीं है, ईलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं क्योंकि अस्पताल नहीं है।
सुखेन्द्र सिंह बना ने कहा कि भाजपा सरकार विधानसभा से भाग सकती है लेकिन जनता की अदालत से भाग नहीं पाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे विधानसभा के अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री का जो आचरण सदन के अंदर रहा है उससे धृतराष्ट्र और दुर्योधन भी शरमा रहे हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि आज रीवा समदड़िया के हाथों में गिरवी रख दिया।
गिरीश भंडारी ने कहा कि आज पूरे देश और हमारे प्रदेश में मोदी और शिवराज सरकार ने प्रजातांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। प्रदेश में विकास की बातें सिर्फ किताबों में हैं। असलियत यह है कि जनता बेहाल और परेशान है।
डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि सोमनाथ चटर्जी तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष ने सभी विधानसभा अध्यक्षों के सम्मेलन में एक वर्ष में कम से कम 60 दिन सदन चलने हेतु सहमति बनी थी तथा गोवा सम्मेलन में एक वर्ष में कम से कम 70 दिन विधानसभा चलाने का कार्यक्रम तय हुआ था लेकिन भाजपा सरकार ने 5 सालों में सिर्फ 135 दिन सदन चलाया जबकि श्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में 284 दिन 11 वीं विधानसभा में 288 दिन सदन चलाया गया था। इस सरकार ने विधानसभा में प्रश्नों के गलत जबाव प्रस्तुत किए तथा अकसर यह जवाब मिलता है कि जानकारी एकत्रिंत की जा रही है। 431 ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी तक प्राप्त नहीं हुआ। सदन संसदीय कार्यमंत्री के इशारे पर ही चलता है।




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