प्रदेश में संविदा के पद नियमित होंगे

प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों में निर्मित संविदा के पद चरणबद्ध ढंग से नियमित पदों में परिवर्तित किये जायेंगे। इसके अलावा प्रत्येक विभाग में भर्ती किये जाने वाले पदों में से 20 प्रतिशत पद संविदा पर नियुक्त अधिकारियों/कर्मचारियों के लिये आरक्षित रहेंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से नये नीति-निर्देश जारी कर दिये हैं। ये नीति-निर्देश विभिन्न शासकीय विभागों एवं मप्र रोजगार गारंटी परिषद, राज्य/जिला स्वास्थ्य समिति एवं मप्र सर्वशिक्षा अभियान मिशन में संविदा पर नियुक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्ति प्राप्त करने के अवसर प्रदान करने के लिये जारी किये गये हैं।

इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब समस्त विभाग स्वीकृत संविदा के पदों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में वर्गीकृत करेंगे। हर विभाग में बीस प्रतिशत पद संविदा पर नियुक्त कर्मियों के लिये आरक्षित रहेंगे। जिन्हें संविदा पद पर काम करने का पांच वर्ष का अनुभव हो गया है, वे ही नियमित होने के पात्र होंगे। नियमित पद के लिये आवश्यक शैक्षणिक योग्यता रखना होगी। संविदा कर्मियों के लिये आरक्षित किये गये सीधी भर्ती के नियमित पदों पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से चयन होगा। जितने वर्ष संविदा के पद पर काम किया गया है उतने वर्ष की आयु सीमा में छूट मिलेगी परन्तु 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग पात्र नहीं होंगे। लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाने वाले प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के पदों पर बीस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं होगा परन्तु जितने वर्ष संविदा में काम किया है उतने वर्ष की इन पदों के लिये आयु सीमा में छूट मिलेगी।

नये दिशा-निर्देशों के अनुसार, जब तक संविदा कर्मी नियमित पदों पर नियुक्त नहीं किये जाते हैं तब तक उन्हें हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृध्दि के आधार पर वेतनवृध्दि का लाभ दिया जायेगा। इसके अलावा संविदा कर्मियों का मासिक पारिश्रमिक नियमित पद के वेतनमान के 90 प्रतिशत के बराबर होगा। संविदा कर्मियों को एक साल में तेरह दिन के आकस्मिक अवकाश, 15 दिन का अर्जित अवकाश तथा दस दिन का लघुकृत अवकाश दिया जायेगा। संविदा पर नियुक्त महिला कर्मी को 90 दिन के प्रसूति अवकाश का लाभ भी दिया जायेगा।

मप्र संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ भोपाल का कहना है, ‘हम सरकार के इन दिशा-निर्देशों से सहमत नहीं हैं। इससे तो 1 लाख 83 हजार संविदा कर्मियों में से सिर्फ 15-20 हजार कर्मियों को ही लाभ मिलेगा। बिना चयन परीक्षा के सीधे नियमित करने का मांग-पत्र सीएम को दिया है। यदि दिशा-निर्देशों में संशोधन नहीं किया जाता है तो हम 20 जून के बाद फिर आंदोलन करेंगे।

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