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मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में पांचवे वर्षगाँठ समारोह का शुभारम्भ
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय जीवन, देशज ज्ञान परम्परा एवं सौन्दर्यबोध पर एकाग्र पांचवे वर्षगाँठ समारोह का शुभारम्भ आज भूरी बाई, अर्जुन सिंह धुर्वे और अक्षय कुमार सिंह सञ्चालक, संस्कृति ने दीप प्रज्वलित कर किया|अन्तराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आयोजित चित्र प्रतियोगिता के पुरस्कृत प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कृत किया गया| जिसमें- आयु वर्ग समूह, 6 से 9 वर्ष तक में प्रथम पुरस्कार से शीतल गुप्ता को, द्वितीय पुरस्कार से आध्या जैन को, तृतीय पुरस्कार से सिद्धार्थ गजभिये को, प्रोत्साहन(सांत्वना) पुरस्कार से हेत मुफ्ती और वरुण मेश्राम को सम्मानित किया गया| आयु वर्ग समूह, 9 वर्ष से अधिक 12 वर्ष से कम में प्रथम पुरस्कार से अनन्त सत्या मोहित को, द्वितीय पुरस्कार से मीत चावला को, तृतीय पुरस्कार से आयुष मेश्राम को, प्रोत्साहन (सांत्वना) पुरस्कार से विजय पटेल और आश्तिक गुप्ता को सम्मानित किया गया| आयु वर्ग समूह, 12 वर्ष से अधिक 16 वर्ष से कम में प्रथम पुरस्कार अन्तरिक्ष सेठिया को, द्वितीय पुरस्कार से रिया जैन को, तृतीय पुरस्कार से स्वस्ति जैन को, प्रोत्साहन(सांत्वना) पुरस्कार से मेहल अजमेरा और निकिता सिंह परिहार को सम्मानित किया गया| प्रत्येक समूह में पांच-पांच पुरस्कार
प्रदान किये गए|
पुरस्कार वितरण के बाद संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर रितुश्री चौधरी के निर्देशन में वर्षा गीतों पर आधारित दादुर के रूप में परिकल्पित एक नृत्याभिनय प्रस्तुति कलाकारों ने प्रस्तुत की| इस प्रस्तुति में भीषण गर्मी से तपती भूमि पर जल एवं वर्षा के लिए प्रार्थना करते जन को दिखाया गया| प्रस्तुति की
शुरुआत सूत्रधार और कलाकारों द्वारा जल के आवाहन से हुई| इस प्रस्तुति में लोक के कई गीतों और दोहों के माध्यम से पानी की जरुरत और पानी न होने से व्याप्त समस्याओं को मंच पर निर्देशक रितुश्री के निर्देशन में बड़े ही लयात्मक रुप से दिखाया गया| प्रस्तुति का अंत सूत्रधार द्वारा रहीम द्वारा रचित रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून| पानी गये न ऊबरे,मोती,मानुष,चून दोहे से हुआ| इस
प्रस्तुति में कलाकारों के माध्यम से दर्शकों को पानी का महत्त्व और पानी बचाने के लिए प्रेरित किया गया है| इस प्रस्तुति में मंच पर सूत्रधार सत्यम आरख सहित अपाला वर्मा, समादिता चन्द्र, अदिति रावत, दीक्षा राणा, फाल्गुन सोनी, रीना वाचन, मजरी शर्मा, उदिता और निधि कक्कड़ सहित लगभग 100
कलाकारों ने अपने नृत्याभिनय से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया| इस प्रस्तुति में गायन में नीता और कोशिक ने सहयोग दिया|
दादुर की प्रस्तुति के पश्चात् मणिपुर और मिजोरम के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुति प्रस्तुत की| जिसमें सबसे पहले मणिपुर से आये कलाकारों ने शिम लाम प्रस्तुत किया| शिम लाम असल में काबुई नागा जनजाति का लोक नृत्य है| यह नृत्य त्याग के परिपेक्ष में किया जाता है तथा फसल की कटाई के पश्चात् इस नृत्य को काबुई जनजाति द्वारा किया जाता है| शिम लाम के बाद मिजोरम से आये
कलाकारों ने चेरव नृत्य प्रस्तुत किया| चेरव नृत्य मिजोरम का पारंपरिक नृत्य है| यह नृत्य प्रायः बांस की ध्वनि पर किया जाता है| जिसमें पुरुष पारंपरिक वस्त्रों में बांस को इधर-उधर करते हैं और महिलाएं नृत्य प्रस्तुत करती हैं| चेरव नृत्य के पश्चात् मणिपुर के कलाकारों द्वारा कटा-बेंलू लाम प्रस्तुत किया
गया, यह जनजातीय नृत्य शैली अविवाहित पुरुष और महिलाओं द्वारा किया जाता है|मणिपुर की नृत्य प्रस्तुति के बाद मिजोरम के कलाकारों द्वारा सरलम काये नृत्य शैली में जनजातियों के मध्य होने वाले युद्ध को मंच पर प्रस्तुत किया गया| प्रस्तुति के अंत में मणिपुर के कलाकारों ने गान-लाम और मिजोरम के कलाकारों ने सोलकिया जनजातीय नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया| मंच पर मणिपुर से आये कलाकारों में अर्जुन, पौजैचुंग, फिलिप, सिमन, जॉनसन, सोनिया, मुमू, मर्सी और अशालू आदि सहित लगभग 20 कलाकारों ने मंच पर नृत्य प्रस्तुत किया| मंच पर मिजोरम से आये कलाकारों में सी. लाल्थालामूआन, लेलरोपुइया, फाबियन, लालनूनपुइया और रामफेल्टतुंगी सहित लगभग 20 कलाकारों ने मंच पर नृत्य प्रस्तुत किया|




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