मनरेगा मजदूरी भुगतान में देरी पर होगी कार्रवाई, नई प्रक्रिया जारी

भारत सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जॉबकार्डधारी मजदूरों को उनसे कराये गये कार्यों का भुगतान 15 दिन के अंदर करने की नई प्रक्रिया जारी की गई है। नई प्रक्रिया में अधिकारियों और कर्मचारियों को उत्तरदायित्व दिया है जिससे मजदूरी के भुगतान में विलम्ब होने पर संबंधित दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कार्यवाही की जा सके।मालूम हो कि मनरेगा एक्ट के तहत 15 दिन में मजदूरी भुगतान न करने पर विलम्बित क्षतिपूर्ति भुगतान संबंधित मजदूर को देय होती है जो कि मजदूरी का 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन होता है। इस संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नये आदेश जारी कर दिये हैं। जारी आदेश में मनरेगा मजदूरी भुगतान के लिए मस्टर रोल क्लोज होने के बाद मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया और समय-सीमा के साथ उत्तरदायित्व का निर्धारण किया गया है।

अब मस्टर रोल पर मजदूरों की उपस्थिति को मनरेगा साफ्टवेयर में ग्राम रोजगार सहायक या क्रियान्वयन एजेन्सी होने की स्थिति में संबंधित एजेन्सी का कम्प्यूटर आपरेटर/कार्यालय सहायक दो दिन में करेगा। इसके बाद मूल्यांकन करने तथा मूल्यांकन का सत्यापन संबंधित उपयंत्री एवं सहायक यंत्री या मनरेगा/विभाग द्वारा नामांकित अधिकारी/कर्मचारी तीन दिन में करेगा।

मूल्यांकित मस्टर रोल की वेज लिस्ट तैयार करना और एफटीओ यानि फण्ड ट्रांसफर आर्डर के लिए प्रेषित करना तथा मूल्यांकित मस्टर रोल जनपद पंचायत पर जमा करने का कार्य संबंधित क्रियान्वयन एजेन्सी के सक्षम अधिकारी/कर्मचारी द्वारा एक दिन में किया जायेगा। प्राप्त वेज लिस्ट का एफटीओ तैयार करने का कार्य सहायक लेखाधिकारी या प्रथम सिगनेटरी के रुप में दर्ज अधिकारी द्वारा एक दिन में किया जायेगा। एफटीओ को डिजिटल हस्ताक्षर सहित बैंक भेजने का कार्य कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत/द्वितीय सिगनेटरी के रुप में दर्ज अधिकारी/कर्मचारी द्वारा एक दिन में किया जायेगा।

मनरेगा साफ्टवेयर के माध्यम से उक्त प्रक्रिया अधिकतम सात दिन में पूरी करना होगी और इसके बाद मस्टर रोल क्लोज हो जायेगा। सात दिन की अवधि समाप्त होने के बाद अधिकतम आठ दिनों में मजदूरी का भुगतान करना होगा। प्रदेश में वर्ष 2017-18 में 62.76 लाख जॉबकार्ड धारी परिवारों में से 31 लाख 34 हजार जॉबकार्ड धारी परिवारों को 1 हजार 271.85 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है जिन्होंने इस अवधि में 2 लाख 38 हजार 99 कार्य पूर्ण किये। उन्हें कुल 3 हजार 396 करोड़ 39 लाख करोड़ रुपये की राशि मजदूरी के रुप में भुगतान की गई है।

इस मामले में राज्य रोजगार गारंटी परिषद भोपाल के सहायक प्रबंधक आईटी पीयूष प्रताप सिंह का कहना है कि मनरेगा में मजदूरी के भुगतान में विलम्ब न हो इसके लिये पहली बार नई प्रक्रिया निर्धारित की गई है जिसके तहत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया है जिससे मजदूरी भुगतान में किस स्तर पर देरी हुई है, इसका पता चल सके और संबंधित दोषी व्यक्ति के विरुध्द कार्यवाही की जा सके।

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