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उभा भारती पर जानलेवा मामले में फैसला 27 को
भाजपा नेता और केंद्र में मंत्री उभा भारती और उनके गार्ड के ऊपर जानलेवा लेवा हमला करने के चर्चित मामले में छतरपुर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एमके बाथम की कोर्ट द्वारा 14 मार्च को फैसला दिया जाना था। न्यायाधीश के अवकाश में होने के कारण फैसले की तारीख बढ़ाई गई।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि 10 वीं बटालियन एसएएफ डी कंपनी कैंप छतरपुर के एएसआई हरिओम प्रसाद लटौरिया जो तत्कालीन घटना के दौरान उभा भारती के सुरक्षाकर्मी के रुप में तैनात थे। हरिओम ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि राजनगर थाना क्षेत्र के चंद्रनगर आम रोड में 8 फरवरी 1998 को दिन के करीब 3.30 बजे तत्कालीन लोक सभा प्रत्याशी उभा भारती जैसे ही अपने गार्ड के साथ आम रोड पर पहुॅची आरोपीगणो ने उनके वाहन सामने जीप अड़ा दी और पथराव कर गोली चलाई। इस वारदात के बाद उभा भारती जैसे ही चंद्रनगर चैकी के सामने पहुॅची उसी समय मनोज त्रिवेदी, अर्जुन सिंह, गोविंद सिंह, भगवानदास नामदेव, सलीम खान, हफीज उर्फ जमाल, रघुवीर प्रसाद, शहादत खान, संजीव राज, लखन लाल दुबे, शंकर नामदेव, फैयाज खान ने उभा भारती के गार्ड हरिओम लाटौरिया के ऊपर पथराव करके गोलियां चलाई। मामले की विवेचना के दौरान इस मामले के दो आरोपी अशोक कुमार और इदरीश की मौत हो गई थी। अदालत ने आरोपियो के खिलाफ आईपीसी की धारा 148, 149, 341, 332, 307 के तहत आरोप लगाए। इस मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एमके बाथम की अदालत ने अंतिम बहस सुनी और मामला अंतिम फैसले के लिए 14 मार्च को नियत किया गया था। बुधवार को कोर्ट के पीठासीन न्यायाधीश अवकाश पर थे। इस कारण इस मामले में फैसला नही हो सका और फैसले के लिए 27 मार्च की तारीख नियत की गई।
विवेचक की गवाही के लिए हाईकोर्ट में होगी निगरानी
गौरतलब है कि इस मामले में निरीक्षक बीएस बघेल सहित चार पुलिस अधिकारियो ने मामले की विवेचना की थी। अदालत के द्वारा पुलिस अधिकारियो को गवाही के लिए नोटिस जारी किए गए। कई बार नोटिस जारी होने के बाद में मामले के विवेचक गवाही देने कोर्ट के सामने नही आए। कोर्ट के द्वारा उनकी गवाही का मौका खत्म किया था। इस मामले में अंतिम बहस के दौरान मामले के सही निराकरण के लिए अभियोजन की ओर से एजीपी के द्वारा कोर्ट में एक आवेदन धारा 311 के तहत मामले की विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारियो को गवाही में बुलाने के लिए पेश किया था जिसे अदालत ने निरस्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जबलपुर में निगरानी करने के लिए एजीपी ने कलेक्टर के माध्यम से विधि विभाग भोपाल को पत्र के साथ निगरानी भेज दी है।




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