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300 कर्मचारी बिना वैद्य कारण-पूर्व सूचना के अचानक बर्खास्त
देश की प्रमुख समाचार एजेंसी “प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया” :पीटीआई: ने शनिवार 29 सिंतबर 2018 को मध्यप्रदेश से 10 कर्मचारियों सहित देशभर से तत्काल प्रभाव से एक साथ 300 कर्मचारियों को बिना किसी वैद्य कारण और पूर्व सूचना के अचानक बर्खास्त कर दिया है। पीटीआई प्रबंधन के इस अमानवीय और अड़ियल रवैये के चलते 30 साल पुराने कर्मचारी अचानक सड़क पर आ गये हैं और उनके सामने अपने परिवार के पालन पोषण का गंभीर संकट सामने खड़ा हो गया है।पीटीआई के कर्मचारी 29 सितंबर शनिवार को सामान्य तौर पर अपनी ड्यूटी पर आए तो शीर्ष प्रबंधन ने स्थानीय प्रबंधक के माध्यम से ई मेल से भेजे गये नोटिस के जरिये सूचित किया कि आपको तत्काल प्रभाव से पीटीआई की सेवा से हटा दिया गया है और आपके हिसाब किताब के राशि आपके खाते में स्थानांतरित कर दी गई है। मालूम हो कि पीटीआई जिसके द्वारा दिये गये समाचारों पर देश भर का समाचार जगत भरोसा करते हुए उसे प्रकाशित करता हैं । इस संस्थान ने अपने ही 30 साल काम कर चुके 300 कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखाते हुए एक गैर भरोसेमंद काम किया है।
पीटीआई से बर्खास्त कियक गये कुल 300 कर्मचारियों में से दिल्ली मुख्यालय से 77, मुबई से 40, कोलकाता से 26, चेन्नई से 12, हैदराबाद से 12 और मध्यप्रदेश में 10 शामिल हैं। इनमें प्रदेश के भोपाल से पांच, इन्दौर से चार और जबलपुर से एक कर्मचारी को हटाया गया है। स्थिति यह हो गई है कि अनेक केन्द्रों पर पीटीआई संस्थान में एक भी गैर पत्रकार कर्मचारी नहीं बचा है।
छंटनी के लिए एकमात्र कारण दिया गया था कि “आपके लिए कोई काम नहीं” उन्होंने न तो कोई वैध कारण दिया है और न ही उन्होंने इस प्रकार की कार्रवाई को नोटिस किया है।
अब, यह भारत भर में पीटीआई कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही मुश्किल स्थिति है क्योंकि उनमें से अधिकतर 50 साल से अधिक उम्र पूरी कर चुके हैं और वे इस उम्र में कोई और नौकरी पाने या काम कर पाने में सक्षम नहीं हैं। जाहिर है, कर्मचारियों के पास बहुत से देनदारियां हैं जैसे कि उनके बच्चों की शिक्षा, बैंक से लिये गए गृह ऋण की बड़ी किश्त, अपने परिवार चलाने के लिए धन और उसके बाद व्यस्क हुए बच्चों के विवाह जैसी चुनौतियां हैं।
हम, पीटीआई कर्मचारियों ने प्रबंधन से इस छंटनी आदेश से सड़क पर ज्यादातर परिवारों को फेंकने के लिए मनमाने ढंग से किये गये कदम और कठोर व्यवहार की निंदा की और प्रबंधन से अपने आदेश को तत्काल वापस लेने और सभी 300 कर्मचारियों की सेवाओं को वापस लेने की मांग की।
हमारे केंद्रीय नेताओं के निर्देशों के मुताबिक, सेवाओं के कर्मचारियों को अवैध रूप से समाप्त करने के खिलाफ सभी पीटीआई कार्यालयों में राष्ट्र स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।
पीटीआई में पहली दफा हुई इस बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छटनी में सबसे अधिक प्रभावित कर्मचारी इंजीनियरिंग कर्मचारी, ट्रांसमिशन स्टाफ और मैंसेंजर शामिल हैं।




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