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PMKVY में MP में 7 साल में 23 करोड़ का घोटाला, उमंग सिंगार ने CAG की रिपोर्ट के आधार पर लगाया आरोप
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी पीएमकेवीवाय में युवाओं को प्रशिक्षित करने के नाम पर 9200 करोड़ के घोटाले की आशंका जताई जा रही है जिसमें से मध्य प्रदेश में पौने पांच लाख युवाओं पर भारी खर्च दिखाकर 23 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई है। यह आंकड़े विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने जरूर बताए हैं लेकिन उनका आधार सीएजी की रिपोर्ट बताई जा रही है। पढ़िये रिपोर्ट।
देशभर में स्किल इंडिया के नाम केंद्र और राज्य सरकारों ने युवाओं को ट्रेनिंग देने के प्रोग्राम चलाए मगर युवाओं के नाम पर हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ऐसी घपलेबाजी हुई कि सवा करोड़ से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण पर अरबों रुपए का खर्च बता दिया गया। इसको लेकर रविवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने ट्विटर पर तमाम आंकड़ों को पेश करते हुए भाजपा को घेरने का प्रयास किया है। सिंगार का कहना है कि युवाओं को कौशल व रोजगार देने के लिए स्किल इंडिया के तहत पीएमकेवीवाय के तहत प्रशिक्षण दिए गए मगर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में घोटाले के तथ्य रखते हुए 9200 करोड़ रुपए की घोटाले की आशंका जताई है।
प्रशिक्षण पर 10 हजार 194 करोड़ की राशि जारी
सिंगार ने कहा है कि संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट में 2015 से 2022 के बीच पीएमकेवीवाय के आंकड़ों को रखा है जिसमें एक करोड़ 32 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए 10 हजार 194 करोड़ रुपए सरकार द्वारा जारी होने का तथ्य दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि पीएमकेवीवाय दो और तीन में 94 फीसदी लाभार्थियों के बैंक खाते या तो फर्जी निकले या अमान्य पाए गए थे। एक ही बैंक खाता हजारों उम्मीदवारों से जुड़ा पाया गया। एक ही फोटो से सैकड़ों लाभार्थियों को अलग-अलग राज्यों में योजना का लाभ लिया। सीएजी की रिपोर्ट में प्लेसमेंट के आंकड़ों को भी भ्रामक बताया और कहा कि आंकड़े बढ़ा चढ़ाकर पेश किए गए। ऐसे केंद्रों को सक्रिय बताया गया तो बंद हो गए और एक ही व्यक्ति द्वारा एक दिन में कई राज्यों में निरीक्षण दर्ज कर दिया गया।
मध्य प्रदेश में भी योजना में गड़बड़ी की आशंका
सिंगार ने आरोप लगाया है कि इस योजना में मध्य प्रदेश में भी 4 लाख 70 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का दावा किया गया जिसमें लगभग 23 करोड़ रुपए के घोटाले की आशंका है। उन्होंने केंद्र से लेकर राज्य सरकार को इस भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि वह इसे दबाने में लगी है।
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