सेम वर्मा का अजय सिंह को खुला पत्र, मां को घर में जगह दें

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और उनकी पत्नी व भाई के खिलाफ घरेलू हिंसा का परिवाद दायर करने वाली स्व. अर्जुन सिंह की पत्नी सरोज कुमारी के साथ अदालत पहुचे सेम वर्मा ने अाज नेता प्रतिपक्ष को खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अजय सिंह से मां को घर में जगह देने की मांग की है।

पिछले कुछ दिनों में आपकी ओर से मेरा नाम लेकर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कई आरोप लगाए गए। प्रारंभिक आरोपों पर मैं शांत रहा क्योंकि मेरा उद्देश्य एक मां को उनका वांछित स्थान दिलाने में सहयोग का है न कि भाजपा-कांग्रेस की राजनीति करने का..। लेकिन जब आरोप मुझ पर नितांत व्यक्तिगत लगने लगे और मीडिया की सुर्खियां बनने लगे तो मुझे यह खुला खत लिखने को बाध्य होना पड़ा।
1- जैसा कि आप जानते हैं मेरा आपके पिताजी और मेरे आदरणीय मित्र श्रध्देय अर्जुनसिंह से संबंध 34 साल पुराना है। समय-समय पर मित्रता पारिवारिक हुई लेकिन व्यवसायिक कभी नहीं हुई। जैसा कि कतिपय समाचारों में कहा गया .. उसके अनुसार मेरे किसी व्यवसाय में आपके परिवार के किसी सदस्य की भागीदारी नहीं रही। पहले एक दबंग मुख्यमंत्री और फिर एक हरदिल अजीज मित्र ही मेरे संबंधों का मूल आधार थे। इन संबंधों में आपकी माताजी और मेरी भाभीमां श्रीमती सरोज अर्जुनसिंह की भूमिका ठीक सीता मां की तरह दो भाईयों को जोड़कर रखने वाली थी।
2- आपके पिता जब केन्द्र में मंत्री रहे तब मैं एक बार भी उनसे मिलने कभी कार्यालय नहीं गया। एक बार मेरे गृहजिले बैतूल में केन्द्रीय विद्यालय खोलने के लिए पत्र लिखने के अलावा मैंने कोई काम उनसे नहीं कहा। यह सब बताने का आशय इसलिए है क्योंकि ताजे घटनाक्रम के बाद कतिपय तत्व व्यवसायिक या राजनैतिक संबंधों को जोड़ रहे थे।
3- निसंदेह तिवारी कांग्रेस के समय एक दोस्त की हैसियत से मैंने मित्र अर्जुनसिंह और स्व माधवराव सिंधिया के लिए अपने विमान का उपयोग उनको लाने लेजाने में किया लेकिन राजनीति से फिर भी दूरी बनाए रखी। इसका खामियाजा जरूर तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव की नाराजगी के रूप में मुझे झेलना पड़ा।
4- जहां तक बात राजनीति की है तो बीते लोकसभा चुनाव में मित्र अजय शाह के लिए खुलकर सहयोग करना था तो चुनाव के दौरान खुलकर एक माह चुनाव लड़वाया लेकिन मतदान के तुरंत बाद अपने आपको राजनीति से दूर कर लिया। यह बात इसलिए लिखना जरूरी है ताकि आप और आपके लोग यह जान सके कि सेम वर्मा को एक ” मां ‘ की आड़ में राजनीति करने की जरूरत नहीं है.. जब जो करना होगा तो खुलकर करेंगे।
5- निसंदेह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई भाजपा नेता-पदाधिकारियों से मेरा परिचय है लेकिन इन किसी से भी मेरा कोई राजनैतिक संबंध नहीं है। आपके पिताजी के साथ आत्मिक संबंध होने के दौरान भी मेरे स्व सुंदरलाल पटवा से संबंध थे लेकिन दोनों में से किसी ने कभी मुझे राजनैतिक शंका की निगाह से नहीं देखा। ऐसे में अब भाजपाईयों से संबंध के सवाल उठना अजीब सा लगता है।
6-  आदरणीय आपका एक वक्तव्य एक अखबार में पढ़ा कि- शायद मेरी कोई नस ..शिवराज जी ने दबा रखी है तो यह सच है कि मेरी नस दबी है और शिवराज ने ही दबाई है लेकिन वो उनके कुछ धार्मिक नीतियों की है ..जिनके बुजुर्गों की यात्रा, नर्मदा आरती और एकात्म यात्रा सरीखे काम है..जिनका मैंने खुलकर समर्थन किया। चूंकि में एक धार्मिक संस्थान बालाजीपुरम से जुड़ा हूं इसलिए अपने धर्म और अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले को सहयोग करना मेरा कर्तव्य भी है। लेकिन जिन सरकारी नीतियों को मैंने गलत पाया उनका खुलकर विरोध भी किया है। इसलिए वो ( शिवराज सिंह चौहान ) मेरी कोई नस दबाकर मुझे ब्लैकमेल कर रहे हैं..यह आरोप न सिर्फ मेरा बल्कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का भी अपमान है।
7- एक अखबार ने लिखा कि सेम वर्मा और एनएचएआई के बीच 277 करोड़ के मुआवजे को लेकर वो भाजपा के साथ आ गए हैं। इस संबंध में स्पष्ट है कि यह मामला माननीय न्यायालय में है और न्यायालय में मुख्यमंत्री तो क्या प्रधानमंत्री भी हस्तक्षेप नहीं कर सकते। ऐसे में अखबार का यह लिखना या आपका यह कहना..माननीय न्यायालय की अवमानना है।
8- इस परिप्रेक्ष्य में यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मेरी फैक्ट्री की जमीन के बदले मुआवजा हासिल करना मेरा अधिकार है और इस मुआवजे को संपूर्ण रूप से दान करने का संकल्प पत्र भी न्यायालयीन दस्तावेज के रूप में संलग्न है।
9- अब सबसे प्रमुख बात कि आखिर मैं एक ” मां ” के साथ क्यों खड़ा हूं..तो आदरणीय यह वही भाभीमां है जो मेरी मां के देवलोक गमन पर आईं और मेरे सिर पर हाथ रखकर बोली कि- सेम रो मत..मैं अब तुम्हारी मां हूं। बहुत पहले पिता और फिर मां को खोने के बाद ऐसा एक ही हाथ था जो मेरे सिर पर मां की तरह है। इसलिए जब आपके पिताजी के जाने के बाद उनकी बेचारगी को बढ़ते देखा तो मुझे उनका साथ देने आगे आना पड़ा। आप अच्छे से जानते हैं कि बीते 6 सालों में मां को उनका सम्मान दिलाने के लिए मैंने किस नेता या पारिवारिक सदस्य आदि के दरवाजे नहीं खटखटाए..लेकिन यह सब बातें सार्वजनिक करना ठीक नहीं है। आज यदि आपकी पत्नी को आपका बेटा भी मां का सम्मान नहीं देगा तो मेरा फर्ज पुन: एक मां के लिए खड़े होने का रहेगा। मैंने अपनी मां रूकमणि देवी के नाम से श्री रूकमणि बालाजी मंदिर बालाजीपुरम बैतूल में बनवाया है..इसका उद्देश्य भगवान से बड़ी ” मां ” को सम्मान दिलाने का है।
10-आपने अपनी मां के गुमराह होने या भाजपा के बहकावे में आने की बात कही जो पूर्णतः गलत है। 84 साल की उम्र में भी पूर्णतः कांगेसी और स्वाभिमानी हैं। इसलिए उन्होंने कांग्रेस की नीतियों की सराहना अपनी अर्जी में भी की। साथ ही वो बेटी के घर रहना या मेरे आग्रह पर मेरे घर रहना स्वीकार नहीं कर पा रहीं हैं। उनकी अंतिम इच्छा अपने पति के घर में ही जीवन का आखिरी पड़ाव उनकी यादों के साथ गुजारने की है।
 आदरणीय अजय सिंह जी ..मैं भी 80 साल का हो चुका हूं ..भगवान बालाजी ने मुझे पर्याप्त धन-संपत्ति और वैभव दिया है। अब किसी पार्टी , पद  या पैसे की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अधिकार और सम्मान की लड़ाई में मैं हर व्यक्ति के साथ खड़ा हूं। आपसे भी यही  निवेदन है कि घर की बात को अभी भी घर में ही रखने का अवसर है..मां को सम्मान और पति के घर में स्थान मिले..यही मेरी इच्छा है। आप एक प्रतिष्ठित नेता हैं और भविष्य में आपकी और उन्नति की संभावना है लेकिन मां के चरणों से बड़ा कोई घर या पद नहीं है..
आशा है मेरी बातों और तथ्यों को गंभीरता से लेकर विचार करेंगे। मुझे और भाजपा-कांग्रेस की राजनीति को परेकर मां की छोटी सी मांग को निर्विकार भाव से हल करने का प्रयास करेंगे।
आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी..
जय बालाजी

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