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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी फर्जी मतदाताओं के दस्तावेजों की सत्यता की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी मतदाता सूची संबंधी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की रिपोर्ट
फर्जी मतदाता सूची के आरोप को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई कांग्रेस के दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच के लिए अदालत ने चुनाव आयोग को दस्तावेज सौंपे हैं। आयोग से सोमवार तक दस्तावेजों की असलियत संबंधी रिपोर्ट तलब की है। इससे पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ और कांग्रेस के अन्य नेताओं की परेशानियां बढ़ने की संभावना है।फर्जी मतदाता सूची को लेकर प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ सुप्रीम कोर्ट गए थे। दरअसल, इस प्रकरण में नाथ के दस्तावेजों पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताते हुए इन्हें फर्जी करार दिया है। ज्ञात हो,कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाथ ने बीते माह सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मप्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसी तारतम्य में उन्होंने कुछ दस्तावेज भी याचिका के साथ पेश किए थे।
बताया जाता है,कि चुनाव आयोग ने अपने जवाब में इन दस्तावेजों को असत्य करार देते हुए याचिकाकर्ता पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने हक में आदेश लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गुरुवार को कमलनाथ की याचिका का विरोध करते हुए चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह ने कहा कि मतदाता सूची अपडेट करना आयोग का वैधानिक कर्तव्य है।
हालांकि, कमलनाथ की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल व विवेक तन्खा ने आरोपों का जोरदार विरोध करते हुए कहा कि जो दस्तावेज उन्होंने चुनाव आयोग को ज्ञापन के साथ सौंपे, वे सार्वजनिक हैं। विवाद उठने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कमलनाथ के दावे की जांच करने को कहा है। कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह जांच करके सोमवार तक बताए कि क्या यही दस्तावेज कमलनाथ की ओर से उसको भी दिए गए थे। यह आदेश न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमलनाथ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
आयोग ने कमलनाथ का पत्र मिलने से पहले ही मतदाता सूची अपडेट करने का काम शुरू कर दिया था। आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मतदाता सूची की बदलाव करने लायक प्रति मांगी है, जो कि उन्हें नहीं दी जा सकती। मतदाता सूची 18 वर्ष से अधिक आयु के देशभर के लोगों का विस्तृत डाटा है। इसमें व्यक्ति का पते और फ ोटो के साथ ब्योरा दिया गया है। आज के युग में सबसे बड़ी चीज डाटा है। आयोग ऐसा कुछ नहीं कर सकता, जिससे डाटा माइनिंग की गुंजाइश पैदा हो। यह लोगों की निजता के अधिकार का मुद्दा है। उन्होंने कहा,कि आयोग की वेबसाइट पर कोई भी व्यक्ति जाकर मतदाता सूची में अपना ब्योरा जांच सकता है। लेकिन, कोई व्यक्ति किसी दूसरे का ब्योरा नहीं देख सकता। उन्होंने कमलनाथ की ओर से दिए गए दस्तावेज पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके मुताबिक, एक ही नाम की समान 17 महिलाएं मतदाता सूची में दर्ज हैं। एक निजी वेबसाइट से निकाले गए इस दस्तावेज की आयोग ने जांच की। मतदाता सूची से फोटो मिलाकर पाया कि एक समान नाम वाली सभी महिलाएं अलग-अलग हैं और वे वास्तविक मतदाता हैं।




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