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सरकार को विशेष सत्र बुलाने का नैतिक अधिकार नहीं: अजय सिंह
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि 42 दिन पहले ही विधानसभा के इतिहास का सबसे छोटा 5 दिन का पावस सत्र बुलाकर उसे दो ही दिन में खत्म करने देने वाली सरकार को विशेष सत्र बुलाने का कोई अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करवाने से सदन छोड़कर भागी सरकार का प्रस्तावित विशेष सत्र औचित्यहीन है। इसका कांग्रेस विधायक दल न बहिष्कार और पुरजोर विरोध करेगा। सिंह ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र का मंदिर और प्रत्रातंत्र की सर्वोच्च संस्था विधानसभा को सरकार ने मजाक बनाकर रख दिया है।
राज्यपाल, विधानसभाध्यक्ष को लिखे पत्र में नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने कहा कि 25 जून को विधानसभा का इतिहास का सबसे छोटा पावस सत्र आहूत किया गया था। यह सत्र 29 जून तक चलना था। जिसे तानाषाही पूर्ण तरीके से सभी लोकतांत्रिक परंपराओं को दरकिनार दो दिन बाद ही 26 जून को ही अनिष्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। अब 42 दिन बाद फिर से विधानसभा का अकारण एक दिन का विषेष सत्र बुलाया जाना बताता है कि सरकार ने विधानसभा को कठपुतली बनाकर रखा है।
श्री सिंह ने विधानसभाध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि पावस सत्र जो परंपरा अनुसार जुलाई-अगस्त में बुलाया जाता है, इस बार जून में ही बुला लिया गया। किसी भी लोकतंत्र में विपक्ष को अधिकार है कि वह अविष्वास प्रस्ताव लाए। कांग्रेस विधायक दल ने एक विपक्ष का धर्म निभाते हुए जनता की वादा खिलाफी और व्याप्त भ्रष्टाचार तथा घोटालों को उजागर करने के लिए षिवराज सरकार के खिलाफ अविष्वास प्रस्ताव पेश किया था। विपक्ष के इस अधिकार को जिस तरह सदन के अंदर रौंदा गया उसे पूरा प्रदेश जानता है। श्री सिंह ने पत्र में लिखा की अफसोस यह है कि विधानसभाध्यक्ष होने के नाते आप भी सदन के अंदर विपक्ष के सदस्यों के अधिकारों का संरक्षण करने में असफल रहे, और इससे अधिक इस बारे में मैं कुछ कहना नहीं चाहता। श्री सिंह ने कहा कि जब सदन में जनहित के विषयों पर कोई चर्चा ही संभव नहीं है तो सदन का विशेष सत्र बुलाना बेमानी है।
श्री सिंह ने पत्र में लिखा की अचानक मात्र 42 दिन बाद विधानसभा का एक दिन का विषेष सत्र बुलाना बताता है कि सरकार विधानसभा को बच्चों का खेल समझ रही है। जब चाहे स्थगित कर दिया, जब चाहे उसे बुला लिया। लोकतंत्र के मंदिर के साथ यह खेल शर्मनाक है और जनता के धन की बरबादी है। उन्होंने पत्र में लिखा की वर्ष 2018 के चुनाव में प्रदेश की जनता जनादेश देगी उसे ही अब सत्र बुलाने का अधिकार होगा। भाजपा सरकार नैतिक रूप से यह अधिकार खो चुकी है।
श्री सिंह ने राज्यपाल को लिखे पत्र में पावस सत्र के साथ घटित हादसे से अवगत कराते हुए कहा है कि विधानसभा का यह विषेष सत्र औचित्यहीन है। इसलिए राज्यपाल अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कर रोक लगाएं।




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