लोकायुक्त के छापे में करोड़पति निकले आईपीएस मयंक जैन की नौकरी समाप्त

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मयंक जैन को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीन महीने की तनख्वाह और भत्ते देकर नौकरी से निकालने के आदेश किए हैं। मामला राज्य सरकार को भेज दिया है और अब इस पर जल्द ही अमल होने के आसार हैं। जैन करीब चार साल से ज्यादा समय से निलंबित चल रहे हैं।मयंक जैन एमबीबीएस हैं और 1995 में आईपीएस में चयनित होकर नौकरी ज्वाइन की थी। उनके बैच में सात अधिकारी हैं जिनमें तीसरे नंबर पर जैन का रिकॉर्ड था। मई 2014 में मयंक जैन के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने छापे की कार्रवाई की थी जिसमें उनके पास करोड़ों रूपए की संपत्ति मिली थी। उस समय उनके भोपाल सहित इंदौर, उज्जैन, रीवा और खरगोन स्थित ठिकानों पर एकसाथ छापे मारे थे। भोपाल में जैन के परिवार का नर्सिंग होम मिला था तो काफी जमीनें भी उनके व उनके परिजनों के नाम पाई गई थीं।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मयंक जैन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह भी किया था और आरोप लगाया था कि उन्हें षड़यंत्रपूर्वक फंसाया जा रहा है। तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस पीपी नावलेकर ने भी अपनी तरफ से सफाई दी थी और कहा कि अगर विवेचना में कोई पक्षपात सामने आएगा तो वे कार्रवाई करेंगे। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार ने 31 मई 2014 को निलंबित भी कर दिया और तब से वे निलंबित चल रहे थे।
मयंक जैन की सेवा समाप्त करने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने मार्च 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था। इसमें अखिल भारतीय सेवा नियम 1958 का हवाला कर जैन की सेवाएं समाप्त करने का जिक्र भी किया गया था। इसके आधार पर 16 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जैन की सेवाएं समाप्त करने के लिए राज्य शासन को आदेश दिए हैं। मप्र शासन से अपेक्षा की है कि उक्त आदेश का पालन कर उन्हें सूचित किया जाए।

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