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पटेल ने तीन साल में 565 राज्यों का एकीकरण करके दिखाया, जो अभूतपूर्व:
भोपाल शहर सरदार वल्लभभाई पटेल का आभारी है। विलीनीकरण आंदोलन के समय उनके निर्णायक पत्र ने भोपाल की जनतांत्रिक इच्छाओं का सम्मान किया और भोपाल भारतीय संघ में शामिल हुआ। जर्मनी के एकीकरण के नायक बिस्मार्क की तुलना में सरदार पटेल ने केवल तीन साल में 565 राज्यों का एकीकरण करके दिखाया, जो विश्व में अभूतपूर्व है।मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग,स्वराज संस्थान संचालनालय, धर्मपाल शोधपीठ, भोपाल के तत्वावधान में, सरदार वल्लभभाई पटेल और भारतीय राजनीति, विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शुभारंभ अपर
मुख्य सचिव संस्कृति मनोज श्रीवास्तव ने स्वराज भवन सभागार में किया। संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थाओं के विद्वानों ने शिरकत की।
अपर मुख्य सचिव, मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि सिविल सेवा का गठन और नियमितिकरण भी उनकी एक बड़ी प्रशासकीय उपलब्धि है। पटेल के योगदान का आकलन आज भी अधूरा है।
बीज वक्तव्य देते हुए रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता के डॉ. हितेन्द्र पटेल ने कहा कि इतिहासकार राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। सरदार पटेल इतिहास के निर्माता थे। उनका मूल्यांकन सन् 1946 से 1950 के बीच के संक्रमण काल में उनकी निर्णायक भूमिका को लेकर किया जाना चाहिए। देश हित में लिये गये उनके कई कठोर निर्णयों का श्रेय उन्हें नहीं मिला। शोध के द्वारा उनके जीवन के सभी पक्षों को सामने लाया जाना चाहिए।
उत्तराखंड के डॉ. संजय कुमार ने सरदार पटेल को समकालीन नेताओं में महत्वपूर्ण निरूपित करते हुए बिहार में जमींदारी समाप्त करने के प्रसंग में उनकी न्यायप्रियता का उल्लेख किया। अलवर की डॉ. अनुराधा माथुर ने सरदार पटेल की राजनीतिक दृष्टि पर प्रस्तुत अपने शोध में बताया कि वे मजबूत केन्द्र के पक्ष में थे। सरदार पटेल जाति, धर्म, भाषा से परे देश के प्रति निष्ठा को सर्वाधिक महत्व देते थे।
जयपुर की डॉ. मुन्नी पारीक ने बोरसद सत्याग्रह का विश्लेषण करते हुए उसे जन-आंदोलन में परिणित करने में सरदार पटेल के नायकत्व का विवेचन प्रस्तुत किया। पुणे के डॉ. एस.के. नाथ ने कहा कि हर विचार की एक उम्र होती है किन्तु सरदार पटेल की नीतियाँ और विचार आज अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। जूनागढ़ के डॉ. प्रद्युम्न खाचर ने जूनागढ़ को भारत में मिलाने की कठिन किन्तु रोचक कहानी को स्लाइड और चित्रों के माध्यम से समझाया।
दूसरे सत्र में चण्डीगढ़ के डॉ. प्रशांत गौरव, सागर के डॉ. ब्रजेश श्रीवास्तव, वड़ोदरा की डॉ. मैत्री वैद्य सबनीस एवं डॉ. विभूति पारेख तथा मुंगेर के डॉ. जी.सी. पाण्डे ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये। सभी शोध पत्रों में सरदार वल्लभभाई पटेल के विभिन्न पक्षों की विवेचना की गई। संगोष्ठी में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा-सुमन भी अर्पित किये गये।




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