विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा महिला और आदिवासियों पर ध्यान को फोकस किए है तो कांग्रेस ओबीसी पर ध्यान लगाए है। मगर कांग्रेस में ओबीसी का नेता बनने वालों में जो होड़ मची है, वह पूरे ओबीसी को साथ लेकर चलने की नहीं बल्कि अपने समाज तक सीमित दिखाई दे रही है। पढ़िये रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का टारगेट ओबीसी ज्यादा दिखाई दे रहा है और पार्टी के नेता राहुल गांधी द्वारा शाजापुर जिले में सभा में इस वर्ग की बात करते हुए जिसकी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी की बात कहकर ओबीसी नेताओं के लिए मौका दे दिया है। कांग्रेस में ओबीसी नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, विधायक सिद्धार्थ कुशवाह, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल जैसे नाम हैं। मगर ये संपूर्ण ओबीसी का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम है, इस पर पार्टी के भीतर ही कई लोग सवाल उठाते रहे हैं।
अरुण यादवः पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं और उनके पिता सुभाष यादव ओबीसी के बड़े नेता थे जिनकी राजनीतिक विरासत तो अरुण यादव ने संभाल ली मगर उनके साथ ही लोग कहे हैं कि ओबीसी का सर्वमान्य नेता बनने में उन्हें और वक्त लगेगा। वे अभी केवल यादव समाज को आगे बढ़ाने की बातें करते हैं जिससे उनकी छवि धीरे-धीरे यादव समाज के नेता की बनती जा रही है।
राजमणि पटेलः राज्यसभा सदस्य हैं और उनका लंबा राजनीतिक सफर रहा है लेकिन कहा जाता है कि ओबीसी के होने के बाद भी वे उस वर्ग के नेता बन पाने में कामयाब नहीं रहे हैं। कमलनाथ ने उन्हें ओबीसी विभाग के अध्यक्ष पद से भी हटाया है और कहा जाता है कि इसके पीछे उनके नेतृत्व में ओबीसी विभाग के संगठन को मजबूती नहीं मिलना रहा।
जीतू पटवारीः विधायक हैं और कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे हैं। पटवारी में ओबीसी नेता बनने की संभावना है लेकिन उनके साथ पार्टी के ही कुछ बड़े नेता नहीं हैं। हाईकमान के सहारे वे अब तक कांग्रेस की राजनीति में टिके हैं, नहीं तो कई नेता उनका राजनीतिक जीवन समाप्त करने में जुटे हैं। उनके पास संगठन को चलाने का भी अनुभव है।
सिद्धार्थ कुशवाहः विधायक हैं और उनके साथ अभी तक पिता सुखलाल कुशवाह की छाप है। कमलनाथ ने उन्हें ओबीसी विभाग का अध्यक्ष बनाकर इस वर्ग के सर्वमान्य नेता बनने का मौका दिया था मगर वे इसमें अपने व्यवहार की वजह से आगे नहीं बढ़ सके हैं। किसी न किसी कारण से विवाद में रहते हैं और कुशवाह समाज तक ही उनका दायरा बताया जाता है।
कमलेश्वर पटेलः विधायक हैं और कमलनाथ की सरकार में मंत्री रहे हैं। उनके पिता की राजनीतिक विरासत उन्होंने संभाल ली है लेकिन वे प्रदेश में विंध्य के नेताओं की लड़ाई में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने दिल्ली में एआईसीसी में अपनी पकड़ बनाई है। मगर उनकी छवि संपूर्ण ओबीसी के नेता की जगह कुर्मी समाज के नेता की ज्यादा बन चुकी है।
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