ई-टेंडरिंग में धांधली रोकने के लिए लगाई नकेल

राज्य शासन के वित्त विभाग ने ई-टेंडरिंग में धांधली रोकने के लिए नकेल लगाई है। अब ई-टेंडरिंग पोर्टल यानि ई-प्रोक्योरमेंट पर टेंडर जारी होने, उसके दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा बिड सब्मिशन की वही तारीख देनी होगी, जो समाचार-पत्रों में जारी विज्ञापन में दी जाती है। दरअसल पहले हो यह रहा था कि समाचार-पत्र में टेंडर के विज्ञापन के विज्ञापन में टेंडर डाक्युमेंट जिस तारीख से उपलब्ध कराने का उल्लेख होता था, उससे आगे की तिथियों में ई-प्रोक्योरेमेंट पोर्टल पर टेंडर डाक्युमेंट उपलब्ध कराये जाते थे।मसलन, यदि विज्ञापन में 20 मई से टेंडर डाक्युमेंट उपलब्ध कराने तथा बिड सब्मिशन की अंतिम तिथि 26 मई का उल्लेख है तो पोर्टल पर 25 मई को टेंडर डाक्युमेंट उपलब्ध कराये जाते थे और ठेकेदारों को बिड सब्मिशन के लिये सिर्फ एक दिन का ही समय मिल पाता था। ऐसे में कुछ ही लोगों को टेंडर का लाभ मिल पाता था। कुछ विभागों में यह गड़बड़ी भी पकड़ में भी आई जिसमें ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल चलाने वाले जिम्मेदार पाये गये। इसी कारण यह नवीन व्यवस्था बनाई गई है।

कौन चलाता है ई-प्रोक्योरमेंट
प्रदेश में ई-टेंडरिंग की शुरुआत 7 सितम्बर,2006 से तत्कालीन सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (वर्तमान में यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग हो गया है) ने नोडल एजेन्सी एमपी सोसायटी फार प्रमोशन आफ इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी-मेप आईटी के माध्यम से प्रारंभ की थी। परन्तु इसके बाद 24 अप्रैल,2012 से यह काम मप्र राज्य इलेक्ट्रानिक विकास निगम (MPSEDC) को नोडल एजेन्सी बनाकर दे दिया गया। MPSEDC ने ई-टेंडर हेतु ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल एक निजी सर्विस प्रोवाईडर कंपनी को दे दिया है। वर्तमान में यह निजी कंपनी टीसीएस ज्वाईन्ट वेंचर विथ एन्टारेस सिस्टम है।

वित्त संहिता के तहत जारी किया प्रावधान
ई-टेंडरिंग में गड़बडिय़ों का पता चलने पर अब वित्त विभाग के प्रमुख सचिव पंकज अग्रवाल ने वित्त संहिता भाग-एक के नियम बीस के तहत नवीन व्यवस्था की है। अब ई-प्रोक्योरमेंट के माध्यम से टेंडर जारी करने वाले विभाग को बिड वेरीफिकेशन रिपोर्ट व उस पर की गई कार्यवाही का स्पष्ट उल्लेख करना होगा तथा रिपोर्ट व की गई कार्यवाही दोनों को टेंडर स्वीकृत करने वाली कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा, समाचार-पत्रों में निविदा सूचना प्रकाशन की तिथि के साथ ही ई-टेंडरिंग पोर्टल पर निविदा प्रपत्र उपलब्ध कराने की तिथि का उल्लेख करते हुये यह स्पष्ट करना होगा कि निविदा अभिलेख (टेंडर डाक्युमेंट) उपलब्ध कराने के उपरान्त बिड सब्मिशन के लिये कितना समय दिया गया है।

वित्त विभाग मप्र के उप सचिव अजय चौबे ने मामले में कहा, ‘ई-टेंडरिंग में सर्विस प्रोवाईडर द्वारा गड़बड़ी करने की शिकायतें सामने आई थीं तथा इस कारण से एक टेंडर निरस्त करना पड़ा था। इसीलिये अब वित्त संहिता के तहत ई-टेंडर में डाक्युमेंट जारी करने एवं बिड सब्मिशन की तिथि का उल्लेख प्रकाशित विज्ञापन के अनुसार करने का प्रावधान किया गया है।’

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