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अारिफ अकील-पचौरी संगत में पंगत में दिखे, नजरें नहीं मिलाईं
कांग्रेस में गुटबाजी समाप्त हो जाए, यह संभव नहीं है। विधानसभा चुनाव में भी ऐसे कोशिशें की जा रही हैं जिसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को। सिंह तीन दिन से भोपाल में समन्वय का काम कर रहे हैं लेकिन यहां की राजनीति के ध्रुवीकरण के केंद्र पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी व विधायक आरिफ अकील के बीच वे भी समन्वय नहीं बैठा सके हैं। समन्वय समिति के नेता मगंलवार को मानस में थे जिन्होंने पचौरी व अकील को भी ढाई बजे बुलाया था। दोनों नेता वहां पहुंचे मगर उनकी नजरें कभी एकदूसरे से नहीं टकराईं।समन्वय समिति ने सोमवार को रात साढ़े ग्यारह बजे तक वन टू वन मुलाकात किया और मंगलवार को सुबह 11 बजे फिर कई नेताओं से चर्चा के लिए मानस भवन में कार्यक्रम में पहुंच गया। इसके बाद लगातार साढ़े तीन घंटे तक दिग्विजय सिंह ने लाइन में लगे नेताओं की बातों व प्रत्याशियों के दावेदारों के कानाफूसी की। यह सिलसिला दोपहर दो तक चला। कुछ लोगों अपने समर्थकों को दावा पेश करने रूप बदल लिया।
सुबह 11 बजे दिग्विजय सिंह ने मंच पर लोगों की बातों को कान में सुनना शुरू किया। यह सिलसिला ढाई बजे तक चला। हालांकि कुछ लोगों के दूसरे जिलों से आने पर सिंह ने नाराजगी भी जताई। उन्हें डांटते हुए उनकी बात सुनी और देरशाम कमलनाथ के साथ बैठक में दिखाई दिए। ज्यादातर लोगों ने दिग्विजय सिंह के कान में संगठन से नाराजगी नहीं बल्कि प्रत्याशी का नाम की सिफारिश की। वहीं, दिग्विजय सिंह मंच से कहते रहे कि समन्वय समिति टिकिट बांटने नहीं आई है। मगर उनसे मिलने वाले लोग केवल और केवल टिकिट की मांग करते दिखाई दिए।




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