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PM कुसुम योजनांतर्गत कार्यशाला आयोजित, चयनित कृषकों को लेटर ऑफ अवार्ड वितरित
भोपाल के मिंटो हॉल में म.प्र.ऊर्जा विकास निगम द्वारा आयोजित कार्यशाला जिसमे विभिन्न निर्माता कंपनियां, कंसल्टेन्ट्स, बैंक इत्यादि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला प्रातः सुबह 10ः00 बजे से सायं 04ः00 बजे तक रही जिसमें किसानां ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान इस कार्यशाला के माध्यम से करने का प्रयास किया। कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने सोलर पॉवर प्लांट लगाने हेतु आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी दी तथा किस प्रकार सरल प्रक्रिया के माध्यम से लोन स्वीकृत किया जा सकें, इसकी जानकारी इस कार्यशाला के माध्यम से दी गई। भिन्न निर्माता इकाईयों जिसमे पैनल निर्माता, इन्वर्टर निर्माता आदि ने अपने उत्पादों के बारे मे तथा उनकी विश्वसनीयता के बारे मे जानकारी आदान-प्रदान की गई।
कार्यशाला के समापन कार्यक्रम के दोरान नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने किसानों से रूबरू होते हुये बताया कि सोलर पॉवर प्लांट के बीज के रूप मे जो पैदावार आज प्रारंभ की जा रही हैं उसका प्रतिफल 25 वर्षो तक किसान भाईयों को मिलता
रहेगा। 01 मेगावॉट पॉवर प्लांट के स्थापना पर लगभग 18 से 20 लाख यूनिट प्रति वर्ष विद्युत
का उत्पादन होगा जिससे किसानों को लगभग 55 लाख की वार्षिक आय होगी। इस हेतु विद्युत
उत्पादन की नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर रू. 3-07 पैसे निर्धारित हैं। माननीय मंत्री ने
बताया कि किसान भाई इस योजना का उपयोग करने से एक उद्योगपति कहलाने की श्रेणी मे
होंगे।
ऊर्जा मंत्री, श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपने उद्बोधन मे बताया कि सूर्य अपनी रोशनी देने मे कोई भेद-भाव नही करता, वह सम-भाव से सभी को एक रूपता के साथ रोशनी प्रदान करता हैं। इस सूरज की रोशनी का दोहन अधिक से अधिक कर हम अपनी आर्थिक स्थिति को ओर अधिक सुधृण एवं मजबूत कर सकते हैं। किसानो द्वारा अपनी खेती पर स्थापित किये जाने वाले सोलर पॉवर प्लांट से उत्पादित बिजली को विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा शासन के नियमों के तहत क्रय करने के लिए कटिबद्ध हैं। किसानों एवं विकासकों को इस संबंध मे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी वेगी।
दोरान नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव श्री संजय दुबे ने कुसुम-अ योजना
के संबंध मे किसानां विकासकों आदि के समक्ष विस्तृत रूप से जानकारी प्रस्तुत की गई उनके द्वारा
यह बताया गया कि किसान अब ऊर्जा का उत्पादक होगा जिस कम्पनी से किसान बिजली खरीदते
थे, वे अब बिजली उन्हे बेचेंगे। निर्माता इकाईयों से उन्होने आग्रह किया कि उनके द्वारा यह
आश्वासन दिया जावें कि उनके द्वारा सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना मे उपयोग की जाने वाली
सामग्री उच्च गुणवत्ता की हो, आज की कार्यशाला आयोजन का मुख्य उद्देश्य एक ही छत के नीचे
अपनी समस्याओं/शंकाओं का समाधान हो सकें। मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि मध्यप्रदेश
राज्य अन्य राज्यों को एक प्रेरक के रूप मे कार्य करेगा। वर्तमान मे हमारे किसानां ने मध्यप्रदेश
राज्य को गेहू आदि पैदावार मे अग्रणी राज्य की श्रेणी मे रखा है, उसी तरह आगामी भविष्य मे
ऊर्जा उत्पादन मे भी अग्रणी राज्य की श्रेणी मे स्थापित करेंगे।
कार्यक्रम के अंत मे माननीय मंत्री नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, माननीय मंत्री ऊर्जा विभाग
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव, ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक आदि ने
चयनित 42 किसानां/विकासकों को लैटर ऑफ अवार्ड 75 मेगावॉट सोलर पॉवर प्लांट क्षमता की
स्थापना हेतु वितरित किये गये।
भारत सरकार द्वारा कृषकों की आय में बढ़ोत्तरी एवं आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री
किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान योजना (कुसुम) के घटक अ) के तहत् सौर संयंत्र की
स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों के चयनित विद्युत सब-स्टेशनों के समीप लगभग 5 कि.मी. के दायरे में,
कृषकों द्वारा उनकी अनुउपयोगी/बंजर/कृषि भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के
विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों (एसपीपी) को विकसित करने की योजना है, जिन्हे विद्युत वितरण
कम्पनी के चिन्हित 33/11 केवी सब-स्टेशनों से सीधे जोड़े जाने का प्रावधान है तथा इसमे
कृषक/कृषक के समूह/सहकारी संस्थान/पंचायत/किसान उत्पादक संगठन/जल उपयोगकर्ता
संघ/शासकीय कृषि विश्वविद्यालय या अन्य कृषि सम्बन्धित शासकीय संस्थान अथवा डेवलपर के
माध्यम से भी योजना अंतर्गत पात्रता होगी। यदि आवेदक, सोलर संयंत्र (एसपीपी) स्थापित करने के
लिए आवश्यक इक्विटी की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे डेवलपर के माध्यम से सौर ऊर्जा
संयंत्र को विकसित करने का विकल्प चुन सकते हैं। डेवलपर द्वारा कृषक को आपसी सहमति से
तय दरों पर लीज रेंट दिया जावेगा। इन संयंत्रों से उत्पादित विद्युत म.प्र. पॉवर मेनेजमेंट कम्पनी
लि. द्वारा क्रय की जायेगी।
भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा इस योजना हेतु कुल 300
मेगावॉट का विशेष पैकेज निर्धारित किया गया हैं।
सौर ऊर्जा उत्पादक का चयन प्रदेष में विद्युत कंपनी द्वारा चिन्हित सबस्टेषनों में, म.प्र.
विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित सीलिंग टेरिफ (दर) पर, म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा
निविदा के माध्यम से सौर ऊर्जा उत्पादक का चयन किया जाता है।
चयनित सौर ऊर्जा उत्पादक, स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र से उत्पादित ऊर्जा को निविदा में उनके
द्वारा दी गई विद्युत दर पर म.प्र. पॉवर मेनेजमेंट कंपनी को 25 वर्ष तक विक्रय कर सकेंगे। इस
हेतु उन्हें म.प्र. पॉवर मेनेजमेंट कंपनी के साथ 25 वर्षों के लिए विद्युत क्रय अनुबंध (पॉवर परचेज़
एग्रीमेंट) करना होगा।




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