NEET पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत: विचार मध्यप्रदेश

सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के साथ हुई धोखाधड़ी पर एक विचार मध्यप्रदेश के कोर कमिटी सदस्य विनायक परिहार द्वारा दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदेश के हक में फैसला सुनाया गया।

ज्ञात हो कि NEET द्वारा मध्यप्रदेश के कई कॉलेजों में प्रदेश के बाहर के लोगों ने प्रदेश का मूल निवासी प्रमाण पत्र लगाकर प्रदेश के बच्चों का हक मारने की कोशिश की थी। इन बाहर के लोगों ने अपने राज्य में भी मूल निवासी प्रमाण पत्र लगाया था और मध्यप्रदेश में भी लगाया था। जबकि एक व्यक्ति एक समय पर किसी एक राज्य का ही मूल निवासी हो सकता है।

इस बात को लेकर विनायक परिहार ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी और कोर्ट ने आदेश दिया था कि पुनः कॉउंसलिंग करायी जाए। लेकिन बजाय प्रदर्श के बच्चों के हित में लिए गए फैसले के साथ खड़े होने के सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। हालांकि यहां भी फैसला प्रदेश के बच्चों के पक्ष में ही दिया गया।

फैसले के तुरंत बाद विचार मध्यप्रदेश के कोर कमिटी सदस्य विनायक परिहार, अक्षय हुंका, विजय बाते आदि ने बैठक की। बैठक के पश्चात प्रेस नोट जारी कर सरकार से यह सवाल पूछे:

1) सरकार ने 2 मूल निवासी प्रमाण पत्र वालों के आवेदन निरस्त क्यों नहीं किये?

2) जब हाइकोर्ट ने प्रदेश के बच्चों के पक्ष में निर्णय दिया तो बजाय उनका साथ देने के सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाना क्यों तय किया?

3) क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कुछ लोगों को फायदा पहुचानें के लिए प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

4) सरकार कोर्ट के आदेश अनुसार कब से कॉउंसलिंग पुनः शुरू कर रही है साथ ही विचार मध्यप्रदेश ने कहा कि अगर सरकार ने इस फैसले का तुरंत पालन नहीं किया तो इसके खिलाफ सड़कों पर उतर कर आंदोलन किया जाएगा।

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