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MP विधानसभाः किताब फेंकने-फाड़ने की एकसाथ दो घटनाएं, सत्ता पक्ष-विपक्ष दोनों कटघरे में
मध्य प्रदेश विधानसभा में आज नियमावली संबंधी किताब को लेकर सदन के भीतर दो अलग-अलग घटनाएं हुईं जिससे संसदीय मर्यादा तार-तार होती दिखाई दी। एक घटना सत्ता पक्ष की तरफ से हुई तो दूसरी विपक्ष ने आसंदी के सामने की। अब इन घटनाओं को लेकर दोनों पक्षों के खिलाफ विधानसभा कार्यवाही करता है या फिर देखना यह है कि दोनों पक्षों का देर-सबेर तालमेल बैठने पर उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पढ़िये क्या रहे घटनाक्रम और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के संसदीय आचरण के क्या बताए गए नियम।
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में आज का दिन बाबा साहब आंबेडकर की संविधान की किताब के साथ अमर्यादित व्यवहार के लिए याद किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा नियमावली संबंधी किताब हाथ में लेकर विपक्ष की तरफ कोई बात कह रहे थे कि अचानक उनके सामने एक विधानसभा कर्मचारी आ गया तो उन्होंने जोर से हाथ झटका और किताब कांग्रेस के विधायकों की तरफ गिरी। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने संसदीय कार्य मंत्री मिश्रा के व्यवहार को असंसदीय आचरण वाला बताया और गुंडागर्दी तक कहा। उनके निलंबन की मांग करते हुए गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। इस कारण सदन की कार्यवाही करीब 40 मिनिट तक स्थगित रही।
आसंदी के सामने विपक्ष ने संविधान की किताब को फाड़ा
जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस विधायक संसदीय कार्यमंत्री के निलंबन की मांग लेकर फिर हंगामा करने लगे। हंगामे के बीच जब आसंदी ने कार्यसूची के अनुसार कार्यवाही को आगे बढ़ाया तो पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने संविधान की किताब को आसंदी के सामने खड़े होकर फाड़ दिया। कागज के टुकड़ों को आसंदी के सामने प्रमुख सचिव और रिपोर्टर्स की टेबल पर फेंक दिए।
विशेषाधिकार हनन का नोटिस
संसदीय कार्यमंत्री के नियमावली संबंधी किताब फेंके जाने की कथित घटना को लेकर कांग्रेस विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने आज दोपहर बारह बजकर 10 मिनिट पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस विधानसभा सचिवालय को सौंपा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष फैसला लेंगे कि यह मामला विशेषाधिकार हनन का बनता है या नहीं। विशेषाधिकार हनन का मामला स्वीकार किए जाने पर इसे विशेषाधिकार हनन समिति को सौंपा जाएगा। वहीं, सज्जन सिंह वर्मा के खिलाफ भी सत्ता पक्ष की ओर से अमर्यादित आचरण को लेकर कार्यवाही की मांग की जा सकती है और उस पर भी विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही का अधिकार होगा।




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