केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के डायरेक्टर के रूप में एकबार फिर वह अधिकारी नियुक्त किया जा रहा है जो किसी राज्य का डीजीपी रहा और चुनाव में सरकार बदलते ही उसे सीबीआई प्रमुख की कुर्सी पर बैठाया जा रहा हो। इसके पहले 2018 में भी मध्य प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी को राज्य के विधानसभा चुनाव में सरकार बदलते ही पद से हटा दिया गया था और कुछ दिन में ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो में उन्हें नियुक्ति दे दी गई थी। इस तरह के घटनाक्रम के अलावा कुछ अन्य समानताएं सीबीआई डायरेक्टर नियुक्ति के दौरान देखी गईं, जिन्हें इस रिपोर्ट में आपसे साझा कर रहे हैं।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए बाकायदा पैनल बनाई जाती है जिनमें से एक अधिकारी का चयन सरकार को करना होता है। पैनल से नियुक्ति के बाद भी सरकार के चयन पर सवाल उठते रहे हैं और एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी विपक्ष उंगली उठाती रही है। इस बार भी सुबोध कुमार जायसवाल डायरेक्टर के बाद दूसरे डायरेक्टर की तलाश की जा रही है और इसमें कर्नाटक के डीजीपी प्रवीण सूद का नाम लगभग तय हो चुका है। जायसवाल का कार्यकाल 25 मई को समाप्त होने वाला है और इसके पहले सूद के डायरेक्टर के आदेश जारी होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
सूद क्यों छोड़ रहे कर्नाटक अब सवाल यह है कि प्रवीण सूद क्यों कर्नाटक जैसे राज्य के डीजीपी की जिम्मेदारी छोड़कर सीबीआई में जा रहे हैं तो इसके पीछे विधानसभा चुनाव के परिणाम हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिल गया है और सूद से कांग्रेस नेता भारी नाराज हैं। कर्नाटक के कांग्रेस नेता व सीएम के प्रबल दावेदार शिवकुमार उन्हें भाजपा की कठपुतली बता चुके हैं। ऐसे में सीबीआई डायरेक्टर के रिक्त हो रही कुर्सी उनके लिए सुरक्षित होगी, अन्यथा कर्नाटक में कांग्रेस सरकार अच्छा व्यवहार नहीं करेगी।
मध्य प्रदेश के शुक्ला भी छोड़ गए थे राज्य सूद के साथ कर्नाटक में जिस तरह की परिस्थितियां बनीं थीं, लगभग 2018-19 में भी ऋषिकुमार शुक्ला के साथ वैसी ही बनी थीं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी थी और कमलनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुक्ला को डीजीपी से हटाकर पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन बना दिया गया था। उसी दौरान आलोक वर्मा के रिटायरमेंट के बाद सीबीआई डायरेक्टर का पद रिक्त हो गया था। शुक्ला को मोदी सरकार ने डीजीपी से हटाए जाने के कुछ दिन बाद ही सीबीआई डायरेक्टर बनाकर बुला लिया था। उस समय मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्ला की नियुक्ति को लेकर आपत्ति भी जताई थी।
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