विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर मध्य प्रदेश में बढ़ रही राजनीतिक गतिविधियों की वजह से भोपाल से लेकर दिल्ली तक सरगर्मी है। सत्ताधारी दल भाजपा में ज्यादा हलचल है लेकिन कांग्रेस में भी उथल-पुथल का माहौल है। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व की पहली और दूसरी लाइन के नेताओं की हाईकमान के साथ एक सप्ताह से टल रही महत्वपूर्ण बैठक की अब नई तारीख आ गई है जिसके लिए करीब आधा दर्जन नेता दिल्ली में पिछले दिनों पहुंच भी गए थे। पढ़िये कांग्रेस की बैठक को लेकर रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं लेकिन भीतरखाने में जो खिचड़ी पक रही है, उसकी गंध से माहौल गरमाया हुआ है। इससे भोपाल से दिल्ली तक कांग्रेस की राजनीति में हलचल मची है जिसकी एक वजह हाईकमान द्वारा प्रदेश के प्रमुख नेताओं को दिल्ली तलब कर बैठक लेने का फैसला है। हालांकि यह बैठक 24 मई और 26 मई की दो तारीखों में टल चुकी है और अब 29 मई की नई तारीख आई है। वैसे इस बैठक को लेकर प्रदेश के कुछ नेताओं में काफी उत्सुकता देखी गई है और वे दिल्ली पहुंच भी गए थे लेकिन तब बैठक टल गई। जो नेता दिल्ली पहुंच गए थे, उनमें डॉ. गोविंद सिंह, विवेक तन्खा, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, नर्मदा प्रसाद प्रजापति जैसे नाम प्रमुख हैं। इन नेताओं ने प्रदेश प्रभारी जयप्रकाश अग्रवाल से भी वहां मुलाकात की। इनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई जो दिल्ली में खींची गई थी।
अभी तक कमलनाथ सब पर भारी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व में पीसीसी चीफ व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ इस समय काफी मजबूत हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह भी कांग्रेस की लगातार हार वाली सीटों पर दौरों का सिलसिला जारी रखकर संगठन में मजबूत पकड़ बनाए रखे हैं। इनके अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी व कांतिलाल भूरिया इन नेताओं के पीछे खड़े हैं लेकिन अन्य नेता कभी इनके पीछे दिखते हैं तो कभी अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कवायद करते नजर आते हैं। इससे विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस के लिए कार्यकर्ता कुछ विधानसभा सीटों पर बिखरा-बिखरा सा दिखाई दे रहा है। संगठन में फैसलों में भी कमलनाथ छाप प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक फैसलों में कमलनाथ की छाप दिखाई देती है जिससे प्रदेश के दूसरे नेताओं के मन में टिकट वितरण में उनकी सुनवाई नहीं होने की शंका-कुशंका नजर आती है। हाल ही में जिले व ब्लॉकों में जो नियुक्तियां की गईं, उनमें कमलनाथ की भूमिका सर्वोपरि रही और दूसरे नेताओं की पूछपरख नहीं रही। हाल ही में विदिशा और डिंडौरी जिला अध्यक्षों की नियुक्ति भी पीसीसी संगठन प्रभारी की जगह कमलनाथ ने सीधे जारी की जिससे संगठन में काम के बंटवारे के औचित्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं। बैठक चुनावी की रणनीति को लेकर कहा यह जा रहा है कि दिल्ली में हाईकमान के साथ प्रदेश के नेताओं की जो बैठक होना है, वह चुनावी रणनीति को लेकर होना है लेकिन इस बैठक में दूसरी लाइन के कुछ नेता अपनी बात रखते हुए संगठन के फैसलों पर सवाल उठाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। वैसे बैठक कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के फार्मूले पर मध्य प्रदेश में काम करने को लेकर होना बताई जा रही है। इसमें मध्य प्रदेश में कर्नाटक की तरह कैसे मुद्दों पर पार्टी को टिके रहना है, यह रणनीति तैयार करना है।
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