मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 को कुछ महीने बचे हैं और ऐसे समय कांग्रेस में बिखराव सा दृश्य नजर आ रहा है। विधानसभा के भीतर जीतू पटवारी के निलंबन से लेकर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास संकल्प में कांग्रेस विधायक एकजुट नहीं दिखाई दिए तो एक सप्ताह से ज्यादा समय से हो रही ओलावृष्टि-बारिश को लेकर पार्टी सड़क पर भी नजर नहीं आई है। दूसरी तरफ भाजपा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे प्रदेश नेतृत्व को शक्ति देने के लिए केंद्रीय नेतृत्व लगातार सक्रिय दिखाई देने लगा है।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 की आहट सुनाई देने लगी है जिसको लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस में गुटीय राजनीति कुछ घटनाक्रमों से दिखाई देने लगता है जो इस बार विधानसभा के बजट सत्र में साफ नजर आया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह को कांग्रेस विधायक सज्जन वर्मा में खुलकर सदन के भीतर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा की मित्रता पर तंज कसा और कहा कि आप दोनों एक हो। वहीं, जीतू पटवारी के निलंबन को समाप्त कराने के प्रयास कांग्रेस विधायक दल की ओर से सदन में नहीं हुए। बताया जाता है कि पटवारी पर सत्तापक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह व कमलनाथ के माध्यम से माफी मांगने का दबाव बनाया गया और जब वे इस पर सहमत नहीं हुए तो सदन के भीतर इस विषय को कांग्रेस ने छुआ तक नहीं।
सदन के बाहर भी बिखराव वहीं, कांग्रेस पार्टी सदन के बाहर भी विधानसभा चुनाव के ऐन पहले बिखरी सी नजर आ रही है। कमलनाथ-दिग्विजय सिंह के बीच संबंधों में दूरी है जिसका पार्टी अधिकृत रूप से खंडन करती रही है लेकिन मौके-बे-मौके सार्वजनिक तौर पर यह सामने आ जाते हैं। राजभवन के घेराव आंदोलन में दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में होने के बाद भी शामिल नहीं हुए। विधानसभा में बजट सत्र के लिए निलंबित विधायक जीतू पटवारी ने रीवा में मंच से दिग्विजय सिंह को उनकी राजनीतिक विरासत का हकदार बता दिया तो इसके बाद उनके निलंबन को समाप्त कराने के प्रयास भी ढीले पड़ गए।
मुद्दे बनाने में नाकाम इसी तरह कांग्रेस किसान-जनता से जुड़े मुद्दों को हाथ में लेने में अब तक नाकाम साबित नजर आ रही है। पिछले दिनों प्रदेशभर में ओलावृष्टि और बारिश से किसान को भारी नुकसान हुआ लेकिन कांग्रेस ने बयानबाजी व सोशल मीडिया पर कमेंट के आगे सड़क पर उतरने का कोई कार्यक्रम नहीं बनाया। प्रदेश हो या जिला, कहीं भी किसान की परेशानियों के लिए खेत या सड़क या जिला प्रशासन के कार्यालयों पर प्रदर्शन की खबरें नहीं आईं।
भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व का प्रदेश में डेरा विधानसभा चुनाव 2023 के मद्देनजर भाजपा सत्ता में होने के बाद भी उसका केंद्रीय नेतृत्व लगातार प्रदेश संगठन को गतिशील बनाए रखने के लिए दौरे कर रहा है। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो कभी गृह मंत्री अमित शाह तो कभी पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा मध्य प्रदेश में आ-जा रहे हैं। रणनीति के तहत भाजपा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को उनके गृह नगर छिंदवाड़ा तक सीमित रखने का काम करने में जुटी है। 25 मार्च को अमित शाह और प्रदेश के कई बड़े नेता वहां जुट रहे हैं। आरएसएस भी मध्य प्रदेश में अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है जिसके तहत भोपाल में सिंधी समाज के बहाने वे लाल परेड मैदान पर बड़े कार्यक्रम में आ रहे हैं। इस कार्यक्रम में सिंधी समाज के हजारों परिवारों के आने की संभावना है।
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