भारतीय जनता पार्टी में पिछले एक दशक में जिस तरह परिवर्तन आया है, उसमें देश के किसी भी कोने में बैठे नेता की सांस पर पकड़ दिल्ली की ही रहती है। इससे मध्य प्रदेश भी अछूता नहीं है जबकि यहां से जनसंघ से लेकर भाजपा के पौधे को लगाने वाले एक से बड़े एक नेता रहे हैं। आज यहां के किसी भी नेता को उसके भविष्य का पता नहीं है कि कल वह किस भूमिका में होगा। फिर चाहे वह केंद्र सरकार में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर हों या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान या फिर संगठन के बड़े नेता माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय, किसी को भी यह पता नहीं कि कल उन्हें क्या जिम्मेदारी मिलेगी।
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