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AICC प्रतिनिधिः दर्जनभर जिलों से कोई नेता नहीं तो सिंधिया के गढ़ से आठ और विंध्य-बुदेलखंड उपेक्षित
मध्य प्रदेश से रायपुर कांग्रेस अधिवेशन के लिए एआईसीसी प्रतिनिधियों की सूची दो दिन पहले जारी हुई है जिसमें न तो विधानसभा चुनाव-नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के आधार पर संतुलन दिखाई दे रहा है और न ही क्षेत्रीयता का पुट नजर आ रहा है। रायपुर कांग्रेस अधिवेशन के लिए 71 एआईसीसी प्रतिनिधि और 28 मनोनीत प्रतिनिधियों सूची में करीब एक दर्जन जिलों के किसी भी नेता का नाम नहीं है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल संभाग में पूरा ध्यान ग्वालियर जिले पर फोकस किया गया है। वहीं विंध्य में सबसे कम सीटें आने के बाद भी एआईसीसी डेलीगेट्स बनाने में नेताओं को तव्वजोह नहीं मिल पाई है तो बुंदेलखंड में नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की बढ़त देखने के बाद भी वहां से भी कम प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे एआईसीसी डेलीगेट्स की सूची में कई खामियां दिखाई दे रही हैं जो विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस की एआईसीसी डेलीगेट्स की सूची में बड़े नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सबसे ज्यादा अपने-अपने लोगों को समायोजित करने में सफल रहे हैं। अन्य दिग्गजों में सुरेश पचौरी, अरुण यादव, अजय सिंह राहुल का उतना प्रभाव पूरी सूची में दिखाई नहीं देता है। पचौरी ने अपने आठ से ज्यादा समर्थकों को एआईसीसी डेलीगेट्स बना लिया लेकिन इनमें से ज्यादातर अपने काम के आधार पर सूची में शामिल हुए हैं। यादव के जो दो समर्थक चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी व केके मिश्रा एआईसीसी डेलीगेट्स बने हैं, वे अपने काम से उसमें शामिल हुए हैं। द्विवेदी को छतरपुर जिले में सभी विधायकों को एकतरफ करते हुए कमलनाथ ने एआईसीसी डेलीगेट बनाकर जिले के नेताओं को संकेत दे दिया है तो वहीं अजय सिंह राहुल के जो दो समर्थक महेंद्र सिंह चौहान व नीलांशु चतुर्वेदी सूची में जगह बना पाए हैं, वह भी उनका काम का आधार माना जा रहा है। चौहान को भोपाल जिले से एआईसीसी डेलीगेट बनाकर पार्टी की तरफ से उनके विरोधियों को एकतरह से आगामी रणनीति का संकेत दे दिया गया है।
विंध्य-बुंदेलखंड से ज्यादा ग्वालियर-चंबल पर फोकस
एआईसीसी डेलीगेट्स की सूची को देखा जाए तो सिंधिया के गढ़ कहे जाने वाले ग्वालियर-चंबल संभाग को विंध्य और बुंदेलखंड से ज्यादा तव्वजोह दी गई है। सिंधिया के क्षेत्र में भी ग्वालियर जिले पर विशेष तौर पर फोकस किया गया है। विंध्य में कांग्रेस की स्थिति 2018 विधानसभा चुनाव में बेहद निराशाजनक रही थी लेकिन इसके बाद भी वहां से मात्र पांच प्रतिनिधि बनाए गए हैं तो बुंदेलखंड में भाजपा के नगरीय निकाय में अच्छा प्रदर्शन होने के बाद भी केवल सात डेलीगेट्स दिए गए हैं। सबसे ज्यादा प्रतिनिधि इंदौर से नौ दिए गए हैं तो भोपाल दूसरे स्थान पर है जहां से आठ नेताओं को एआईसीसी डेलीगेट बनाया गया है। ग्वालियर से चार, जबलपुर से तीन, उज्जैन से पांच, छिंदवाड़ा व राजगढ़ से चार-चार एआईसीसी प्रतिनिधि बने हैं।




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