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कोयला आधारित थर्मल पॉवर प्लांट पी रहे 25 करोड़ लोगों के हिस्सा का पानी
ग्रीन पीस इंडिया के अध्ययन से यह सामने आया है कि भारत में कोयला पर आश्रित थर्मल पॉवर प्लांट देश के करीब 25 करोड़ लोगों के हिस्से का पानी पी रहे हैं जबकि देश के 11 राज्यों में 266 जिले जल संकट से जूझ रहे हैं। सात राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व छत्तीसगढ़ में पॉवर प्लांटों द्वारा पानी का उपयोग किया जा रहा है।
मार्च में ग्रीनपीस इंडिया द्वारा जारी एक विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया था कि प्रत्येक साल कोयला पावर प्लांट भारत में 4.6 अरब घन मीटर जल का इस्तेमाल प्रति वर्ष करते हैं। जल की यह मात्रा 25.1 करोड; लोगों के मूलभूत पानी की जरुरत को पूरा करने में सक्षम है। अगर सभी प्रस्तावित पावर प्लांट को बनाया जाता है, तो गैपीािीग? पानी की यह मात्रा कई गुना अधिक हो सकती है।
कोयला पावर प्लांट पानी का सबसे ज्यादा औद्योगिक उपयोगकर्ताओं में है। देश में इस साल सूखे के बावजूद, कोयला पावर प्लांटों के द्वारा इस्तेमाल हो रहे पानी पर देश की सरकार और नीति निर्माताओं की नज;र नहीं गयी है।
ग्रीनपीस कैंपेनर जयकृष्णा कहते हैं, हमारे देश के ज्यादातर जिले सूखे से प्रभावित हैं और लाखों लोगों का जीवन इसकी चपेट में है। इसके बावजूद भी हम कोयला पावर सेक्टर द्वारा खपत किये जा रहे पानी की बड़ी मात्रा को नजरअंदाज कर रहे हैं। यहां तक कि सरकार सूखा प्रभावित इलाकों में भी कोयला पावर प्लांट को बढ;ाने की योजना बना रही है। अगर लोगों की जीविका और आधारभूत जरुरतों के लिये पानी और कोयला पावर प्लांट के लिये पानी के बीच में किसी को चुनना हो तो निश्चित रूप से आधारभूत जरुरतों के लिये पानी को चुनना ही होगा। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पावर प्लांट को पानी देने की बजाय जरुरतमंद लोगों को पानी मुहैया कराया जाना चाहिए।
अगर यह जल संकट बढ;ता है तो पानी की आपूर्ति को संरक्षित करने के लिये पावर प्लांट को अक्सर बंद करने का भी खतरा बना रहेगा। इससे नये पावर प्लांट निवेशकों के लिये घाटे का सौदा साबित होंगे। इस साल एनटीपीसी, अडानी पावर, जीएमआई, महागैंसों, कर्नाटक पावर कॉर्प जैसी कंपनियों को जल संकट की वजह से अपने पावर प्लांट बंद करने पड;े हैं, जिससे उनके व्यापार को भी नुकसान पहुंचा है।
2016 में जारी जल-संकट ने भारत को मौका दिया है जब वो कोयला आधारित ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करके अक्षय ऊर्जा के दूसरे स्वच्छ स्रोतों की तरफ ध्यान दे। कोयला की तुलना में सोलर और वायु ऊर्जा में पानी की खपत न के बराबर है। सरकार अक्षय ऊर्जा से 175 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य मह्तवाकांक्षी है, लेकिन इसके साथ ही दूसरे नये कोयला पावर प्लांट और वह भी सूखा प्रभावित क्षेत्र में बनाने का प्रस्ताव खतरनाक साबित होगा। जयकृष्णा अंत में कहते हैं, हमें ऊर्जा नीति में सकारात्मक बदलाव करने की जरुरत है, जिससे हमारे नल में पानी और तार में बिजली आती रहे।




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