मध्य प्रदेश में कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से नर्सिंग ऑफिसर्स की भर्ती हो रही है जिसमें शासन 40 फीसदी पद सीधी भर्ती से भरने जा रहा है। मगर इस भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में हाईकोर्ट में दायर याचिका के फैसले के मुताबिक अमल होने की बात भी कही है जिससे भर्ती प्रक्रिया पर अप्रत्यक्ष रूप से निगरानी भी रहेगी। पढ़िये रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश शासन ने नर्सिंग ऑफिसरों के पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है जिसमें 40 पदों की पूर्ति सीधी भर्ती से करने के लिए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से प्रक्रिया शुरू की गई है। नर्सिंग ऑफिसरों के पदों को भरने के लिए 2024 में राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई थी जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि नर्सिंग ऑफिसरों के पद सौ फीसदी पदोन्नति से भरे जाएंगे। मगर इस अधिसूचना के प्रावधान का उल्लंघन करते हुए शासन द्वारा अब 40 पदों को सीधी भर्ती से भरने की तैयारी की जा रही है जिसके लिए करीब 67 नर्सिंग ऑफिसरों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।
हाईकोर्ट द्वारा राज्य शासन को नोटिस जारी
नर्सिंग ऑफिसरों की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। इसमें शासन से चार सप्ताह में जवाब मांगा है और याचिका पर फैसला होने पर भर्ती प्रक्रिया को उसके अनुरूप जारी रखने को कहा गया है। गौरतलब है कि नर्सिंग घोटाले की सीबीआई जांच के बाद राज्य में नर्सिंग फैकल्टी की कमी होने लगी थी और तब काम कर रहे नर्सिंग ऑफिसरों ने असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर काम किया मगर उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया और न ही नियमित ही किया गया। काम करने वाले नर्सिंग ऑफिसरों के इसी परेशानी को हाईकोर्ट में याचिका में बताया गया है। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकलपीठ द्वारा की जा रही है। नर्सिंग ऑफिसरों की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक पांडेय व अंशुल तिवारी द्वारा पैरवी की जा रही है।
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