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सिंहस्थ में पेशवाई के साथ ही मेनन के दिल्ली बुलावे से राजनीतिक गलियारों में चर्चा
भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई के मजबूत स्तंभ बन चुके संगठन महामंत्री अरविंद मेनन की अकस्मात दिल्ली में नियुक्ति की खबर ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को गरम कर दिया है। उनकी जगह गुपचुप ढंग से मध्यभारत प्रांत केआरएसएस के सह प्रांत प्रचारक सुहास भगत की नियुक्ति कर दी गई है। सिंहस्थ में इस तरह के बदलाव को लेकर आम धारणाएं रहती हैं और मेनन के भोपाल से जाने को इसी से जोड़कर देखा जा र हा है।
गुलमोहर कॉलोनी के पास स्थित बीजेपी के एक नेता के रेस्टोरेंट में आरएसएस के प्रमुख संगठनों की बैठक हुई थी जिसमें मेनन को दिल्ली में कुछ प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के फैसले के बारे में बताया गया था। उनकी जगह आरएसएस के सह प्रांत प्रचारक सुहास भगत की नियुक्ति की भी जानकारी दी गई। सूत्र यह बताते हैं कि ये फैसले दिल्ली में कुछ दिन पहले ही ले लि ए गए थे लेकिन इन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया था। रविवार को इस संबंध में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह का प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार चौहान को पत्र भी मिल गया था मगर आज दोपहर तक यह खबर आम हो गई। दोपहर के ब ाद मेनन ने स्वयं बीजेपी दफ्तर में मौजूद रहकर इसकी पुष्टि की। उल्लेखनीय है कि सुहास भगत की जगह आरएसएस में मध्यभारत प्रांत के सह प्रांत प्रचारक के तौर पर अरुण पोडवाल की नियुक्ति भी कर दी ग ई है।
गौरतलब है कि सिंहस्थ के बारे में यह धारणा है कि इसकी शुरूआत से लेकर खत्म होने तक काफी तेजी से राजनीतिक और महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव होते रहे हैं। मेनन को हटाए जाने का फैसला भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मेनन को प्रदेश बीजेपी में संगठन महामंत्री के रूप में करीब पांच साल हो गए थे और उनकी यह पारी सबसे सफल पारी रही। इसमें जहां बीजेपी ने तीसरी बार प्रदेश में सरकार बनाई और इसके बाद लोकसभा चुनाव व उप चुनावों में पार्टी ने कांग्रेस को अच्छी मात दी। मेनन के कारण संगठन और सत्ता के बीच काफी अच्छा तालमेल भी बना रहा।




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