उज्जैन जेल में अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से बंदियों को शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना के बदले परिजनों से मोटी रकम वसूले जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। इस सांठगांठ में उज्जैन के कथित पत्रकार जगदीश परमार की भूमिका बतायी जा रही है जिसके खाते में उज्जैन जेल के बंदी के रिश्तेदार द्वारा 10-10 हजार रुपए ऑनलाइन पेमेंट करने के साक्ष्य सामने आए हैं। जीपीएफ घोटाले के साथ जेल में बंदियों, विचाराधीन बंदियों से होने वाली वसूली के आरोप भी सामने आने से इस मामले में आर्थिक अनियमितताओं के अलावा अन्य गड़बड़ियों की जांच भी जरूरी हो गई है। पढ़िये परमार की वसूली के प्रमाणों के साथ यह रिपोर्ट।
मध्य प्रदेश की जेलों में अधिकारियों और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार में जेल में कैदियं और विचाराधीन बंदियों को शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना, सुविधाएं, मुलाकात आदि आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। इसमें जेल अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा बाहर के तीसरे व्यक्ति की भूमिका के आरोप लगते हैं लेकिन उज्जैन जेल में जीपीएफ घोटाले के बाद कथित पत्रकार जगदीश परमार के जेल अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ बने गठजोड़ से ये आरोप फिट बैठे हैं। अब जगदीश परमार के खिलाफ तमाम साक्ष्य धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।
दस साल से जेल में बंदी के भाई ने दिए प्रमाण इंदौर के रौनक गामी नामक युवक ने 31 मार्च को एसपी उज्जैन को शिकायत की है कि जगदीश परमार ने उससे भाई रोहन गामी को उज्जैन जेल में किसी भी प्रकार की शारारिक व मानसिक प्रताड़ना नहीं देने के लिए रुपए की मांग की थी। उसका भाई दस साल से उज्जैन जेल में बंद है और उसने भाई को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना नहीं देने के लिए पैसे भी दिए। रौनक ने शिकायत आवेदन में कहा है कि जगदीश परमार के कहने पर जेल में चक्कर अधिकारी द्वारा उसके भाई को बुलाकर शारीरिक प्रताड़ना दी जाती है। 10 दिसंबर 2022 को एक बार परमार को रौनक ने 30 हजार रुपए देने की बात कही है तो 26 जनवरी को फिर से दस हजार रुपए ऑनलाइन पेमेंट के साक्ष्य पेश किए हैं।
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