मध्य प्रदेश में अपनी तरह का पहला जीपीएफ घोटाला सामने आया है जिसमें उज्जैन सेंट्रल जेल के कर्मचारियों खाते से 15 करोड़ रुपए की राशि निकालकर हजम कर ली गई। प्रारंभिक जांच में जेल अधीक्षक को दोषी पाया गया और देवास जेल अधीक्षक को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है।
उज्जैन सेंट्रल जेल में एक जेल कर्मचारी की बेटी की कुछ दिनों बाद शादी थी तो जीपीएफ में से राशि निकालने की जरूरत पड़ी और तब यह पता चला कि उसके खाते में से बड़ी राशि निकाल ली गई है। कुछ अन्य कर्मचारियों के खातों से भी इसी रह राशि निकाले जाने की जानकारी के आधार पर डीआईजी मंशाराम पटेल की अध्यक्षता में गठित कमेटी मुख्यालय से जांच करने पहुंची तो प्रारंभिक जांच में यह 15 करोड़ रुपए का घोटाला पाया गया। आईएफएमआईएस साफ्टवेयर से फर्जी भुगतान कलेक्टर उज्जैन ने जेल मुख्यालय को जांच के बाद पिछले दिनों प्रतिवेदन भेजा है जिसमें बताया गया कि फर्जी भुगतान आईएफएमआईएस साफ्टवेयर के माध्यम से किया गया। सरकारी कर्मचारियों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डीपीएफ ट्रांजेक्शन प्रोसेस में राशि एक ही खाते में ट्रांसफर कर अनियमित भुगतान किया गया। कलेक्टर के प्रतिवेदन में घोटाला 13 करोड़ 50 लाख 46325 रुपए बताया गया।
जेल अधीक्षक मुख्यालय अटैच जेल मुख्यालय ने कलेक्टर उज्जैन तथा मुख्यालय की जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उज्जैन सेंट्रल जेल अधीक्षक श्रीमती उषाराज को घोटाले में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उन्हें जेल मुख्यालय अटैच करने के आदेश जारी किए गए। वहीं, देवास जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे को उज्जैन सेंट्रल जेल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।
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