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नाटक बिरसा मुण्डा में बताया : धर्म में भय नहीं विश्वास होना चाहिए
अपनी वीरता, स्वाभिमान, समर्पण और संकल्पबद्धता के कारण इतिहास में स्मरणीय रहे महानायक बिरसा मुंडा एक ऐसे धर्म की स्थापना करना चाहते थे जहां भय नहीं विश्वास हो और लोग स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सके। इसके लिए उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहकर अंग्रेज शासकों को चैन की सांस नहीं लेने दी।
मुण्डाओं के अपमान से उद्वेलित होकर उन्होंने मिशन स्कूल का त्याग कर दिया। मुण्डाओं को संगठित कर सामाजिक जीवन में उन्हें सम्मान दिलाया और इतिहास में विशिष्ट पहचान स्थापित की। अंचल विशेष में बिरसा मुंडा को भगवान की तरह पूजा जाता है। आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत बिरसा मुण्डा जयंती जनजातीय गौरव दिवस अवसर पर रंग मोहल्ला सोसायटी फाॅर परफार्मिंग आर्ट की प्रस्तुति बिरसा मुण्डा का मंचन हुआ। नाटक के निर्देशक प्रदीप अहिरवार ने बताया कि बिरसा मुण्डा के जीवन पर नाटक मंचित करने की मेरी तीव्र इच्छा ने ही मुझे यह नाटक बनाने के लिए प्रेरित किया। वरिष्ठ लेखक ऋषिकेश सुलभ के नाट्यालेख के कारण ही नाटक को रंग-संरचना में पिरोना आसान हो पाया। रंगमंच के जरिये महानायक बिरसा मुंडा को युवा पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना आज की आवश्यकता है। बिरसा मुंडा नाटक में वेशभूषा और संगीत में जनजातीय जीवन की स्थानीयता झलकती है। प्रदीप अहिरवार की प्रकाश एवं मंच परिकल्पना, मानस भारद्वाज के गीत और सुरेन्द्र वानखेडे के कर्णप्रिय संगीत ने नाटक को रोचकता प्रदान की। बिरसा के रूप में रमेश अहिरे ने बिरसा मुण्डा के जीवन को साकार कर दिया। मंच पर सूत्रधार के रूप में अदनान खान एवं कलाकारों के रूप में विवेक त्रिपाठी, सौरभ राजपूत, अभिषेक शास्त्री, बाबी श्रीवास्तव, सुनीता अहिरे, प्रीति खरे का अभिनय सराहनीय रहा।




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