मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय की ओर से रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर 10 से 14 अक्टूबर 2021 तक श्री रामलीला उत्सव का आयोजन किया गया है। पांच दिवसीय रामलीला उत्सव में लीला मण्डल-रंगरेज कला संस्कार उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रतिदिन सायं 6.30 बजे से रामकथा के विभिन्न प्रसंगो की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
जिसमें पहले दिन आज 10 अक्टूबर को शिव पार्वती संवाद, श्रीरामजन्म का प्रयोजन, रावण का विश्व विजय अभियान, श्रीराम जन्म, ताड़का एवं सुबाहु वध, अहिल्या एवं वाटिका प्रसंग, धनुष यज्ञ-परशुराम संवाद प्रसंग की प्रस्तुति दी गई। जिसका प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल https://youtu.be/juknpwpkAxA और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/1233049297162426/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गोंड चित्रकार पद्मश्री भज्जू श्याम, भील चित्रकार भूरी बाई द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर संस्कृति संचालक श्री अदिति कुमार त्रिपाठी, संस्कृति उपसंचालक सुश्री वंदना पाण्डेय, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे। दीप प्रज्वलन के बाद चित्रकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। उत्सव के अवसर पर वनवासी लीला नाट्य आलेख की कथा आधारित 50 चित्रों की प्रदर्शनी संयोजित की गई है, जिसमें लीला नाट्य भक्तिमति शबरी को आंध्रप्रदेश की चेरियालपटम् शैली में तथा निषादराज गुह्य को राजस्थान की नाथद्वारा शैली में प्रस्तुत किया गया है।
पांच दिवसीय श्री रामलीला उत्सव का आगाज भगवान राम की आरती से होता है। इसके बाद शिव-पार्वती संवाद में कैलाश के शिखर की तरह सज्जित मंच पर शिव और पार्वती की उपस्थिति मनोहारी थी। इस प्रसंग में माता पार्वती भगवान शिव से प्रभु श्री रघुनाथ जी की नाना प्रकार की कथा सुनती हैं। इसके बाद श्रीरामजन्म प्रयोजन दृश्य में रावण का विश्व विजय अभियान दिखाया। जिसमें बताया कि रावण ब्रह्मा जी से वरदान पाने के लिए अपने दसों शीष की आहुति देते हैं और ब्रह्मा जी जब प्रकट होते हैं तो रावण उनसे वरदान में अमृत की मांग करता है। तब ब्रह्मा जी रावण को वरदान देते हैं कि देव, दानव, राक्षस अब तुम्हे नहीं मार सकते। इस वरदान के कारण ही भगवान राम का जन्म होता। अगले दृश्य में ताड़का और सुबाहु वध प्रसंग में भगवान राम ताड़का एवं सुबाहु वध करते हैं। अगला दृश्य अहिल्या एवं वाटिका प्रसंग एवं धनुष यज्ञ-परशुराम संवाद दृश्य की शुरूआत राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर दृश्य से हुई। श्री राम शिव धनुष को तोड़ते हैं। शिव धनुष के टूटते ही जहां जयश्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठता है। जानकारी मिलने पर परशुराम की गर्जना से रामलीला मैदान में सन्नाटा पसर गया और तब ही परशुराम संवाद होता है।
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