राहत के अभाव में क्षेत्र से लोग कर रहे है पलायन : कमलनाथ

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज जारी अपने एक बयान में राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बाढ़ के एक माह से अधिक गुजर जाने के बाद भी अभी तक बाढ़ पीड़ित राहत की बाट जोह रहे हैं।ग्वालियर-चम्बल संभाग के 8 जिलों और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में अतिवृष्टि के कारण विगत माह आई बाढ़ ने आमजन के जीवन को बेहाल कर दिया था। बाढ़ से भारी तबाही हुई थी, घर का सामान और सेकडो घर इस भीषण बाढ़ में बह गये, हजारों घरों को नुकसान हुआ, छोटे-छोटे कच्चे घर मय सामान के जमीदोज हो गये, जीवन जीने के लिए कोई सामान नहीं बचा और एक बड़ी आबादी खुले आकाश के नीचे रहने को मजबूर हुई। कई लोगों की इस बाढ़ से मृत्यु हुई, खरीफ की फसलें नष्ट हो गई और किसानों को अत्यधिक नुकसान हुआ।

मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद सरकार ने बाढ़ प्रबंधन के मुकम्मल इंतजाम नहीं किए जिसके कारण बाढ़ से भारी बर्बादी हुई, सड़के तक बह गई, सेकडो पुल-पुलिया बह गये, सड़क मार्ग तक बंद हो गये और पिछले 15 वर्षा के घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की पोल भी इस बाढ़ में खुल गई? आज एक माह बीत जाने के बावजूद प्रभावित खुले आकाश के नीचे रहने को मजबूर है।बाढ़ के बाद सरकार ने सेकडो हवा-हवाई घोषणायें की। जगह-जगह जाकर बाढ़ पीड़ितों को राशन की जगह भाषण दिये गये और राहत, पुनर्वास व पुनर्निर्माण के जुमले दिये गये।बाढ़ के दौरान जिम्मेदारों ने आमजन के मध्य हेलीकाप्टर पर स्टंट तक किये,बाढ़ पर बेतुके बयान दिये, राहत सामग्री के नाम पर फटे-पुराने कपड़े, टूटे जूते-चप्पल बांटकर जनता का मजाक भी उड़ाया गया। बाढ़ प्रभावित आज भी परेशान है, राहत नही मिलने के कारण व रोज़ी-रोटी की तलाश में वो क्षेत्र से बड़ी संख्या में पलायन कर रहे है, इसकी सच्चाई भी सामने आ चुकी है।बाढ़ के बाद से आज तक सड़कों के हाल खस्ता है। बाढ़ क्षेत्रों में और पूरे प्रदेश में सामान्य वर्षा से आज ये हाल है कि शहरों और गांवों में सड़के चलने के लायक नहीं बची हैं। आज लोग गढ्ढों में सड़क ढूंढ रहे हैं और गढ्ढे गिन-गिन कर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। सरकार हमेशा की तरह केवल बयानबाज़ी व घोषणाओं तक ही सीमित है। मुख्यमंत्री की सड़क निर्माण और सुधार की घोषणा के बाद सड़कों पर गढ्ढे भरने के लिए मिट्टी, कचरा और बेकार मलबा सड़कों पर डाला जा रहा है। प्रदेश में पुल-पुलियाओं का बहना और टूटना, सड़कांे का बहना, सड़कों की खस्ता हाल स्थिति होना इस सरकार के द्वारा कराये गये घटिया निर्माण व भ्रष्टाचार की पोल को खोल रहा है।प्रभावितों की सर्वे सूची में अपात्र लोगों के नाम जोड़ दिये गए हैं और अपात्रों को आर्थिक सहायता देने के आरोप भी लग रहे है।मकानों की नुकसानी पर दी जा रही आर्थिक सहायता तो इतनी कम है कि उससे मकानों का निर्माण तो दूर मकानों की मरम्मत तक संभव नहीं है। राहत के नाम पर खोले गये शिविरों से लोगों को बेदखल कर दिया गया है। ग्रामीणजन खुले आसमान के नीचे पन्नी की छत बनाकर अपने दिन काट रहे हैं। सरकार से देरी से पहुंचने वाली राहत ऊॅंट के मुंह में जीरा समान है, बाढ़ पीड़ित आज ख़ुद को ठगा महसूस कर रहे है।बाढ़ को गुजरे एक माह से अधिक समय हो गया है, परन्तु आवागमन हेतु मार्ग की बाधायें अब तक समाप्त नहीं हो पाई हैं ।श्योपुर, दतिया, शिवपुरी एवं अन्य क्षेत्रों में हजारों-लाखों लोगों का आवागमन रोज बाधित हो रहा है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे दिख रही है। आज आवश्यकता है कि बाढ़ पीड़ितों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर काम हो। राहत सामग्री एवं राहत राशि का तत्काल वितरण हो, पुनर्निर्माण एवं पुर्नवास के काम तत्काल शुरू हों।मैं सरकार से मांग करता हॅूं कि राहत के नाम पर की गयी हवाई घोषणाएं और जुमलेबाजी छोड़कर सरकार वास्तविक राहत कार्य प्रारम्भ करें। बाढ़ पीड़ितों को दैनिक जीवनयापन करने की सामग्री तत्काल उपलब्ध कराये, मकानों की मरम्मत एवं निर्माण हेतु राहत राशि का अविलम्ब वितरण कराये, राहत प्राप्त करने वाले पीड़ितों की ग्रामवार सर्वे सूचियों को मीडिया में जारी करे, समस्त क्षतिग्रस्त मार्गों को अविलम्ब आवागमन योग्य किया जाये एवं पुल-पुलियाओं एवं मार्गों के पुनर्निर्माण की तिथि घोषित की जावे।

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