नौटंकी शैली में मंचित किया लाला हरदौल की कथा

जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा प्रदेश की आंचलिक बोलियों में लोकनाट्यों पर केन्द्रित तीन दिवसीय ’पहचान समारोह’ का प्रसारण ऑनलाइन किया जा रहा है। समारोह में प्रत्येक दिवस एक लोकनाट्य की प्रस्तुति संयोजित की जा रही है जिसके द्वितीय दिवस 11 सितम्बर को नौटंकी शैली में लाला हरदौल की कथा को मंच पर प्रस्तुत किया। प्रस्तुति का निर्देशन ग्वालियर के अकबर खां ने किया। नौटंकी शैली में कविता और साधारण बोलचाल की भाषा का मिश्रण होता है। पात्र आपस में बातें करते हैं लेकिन गहरी भावनाओं और संदेशों को अक्सर तुकबंदी द्वारा प्रकट करते हैं।इसमें कलाकार संवाद और अभिनय के जरिए कथा को व्यक्त करते हैं। प्रस्तुति का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल https://youtu.be/6iqBAClkidc और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/539169867339373/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया। प्रस्तुति में लाला हरदौल का जीवन, प्रेम, त्याग, समर्पण और ब्रह्मचर्य आदि को दिखाया गया।

कथा लाला हरदौल के चरित्र पर आधारित थी। प्रस्तुति की शुरूआत लाला हरदौल और उनकी भाभी मां के संवाद से होती है। लाला हरदौल की भाभी चंपारानी देवर हरदौल से कहती हैं कि लाला हरदौल आप विवाह कर लें जिससे नगर और तुम्हारी भाभी मां प्रसन्न हो जाएंगी, लेकिन हरदौल शादी करने से मना कर देते हैं। हरदौल कहते हैं कि वे हमेशा ब्रह्मचारी रहेंगे और भगवान का भजन करेंगे। यह बात उनके बड़े भाई महाराजा जुझारू सिंह को पता चलती है। वे भी महल आकर लाला हरदौल को विवाह करने के लिए कहते हैं लेकिन लाला हरदौल विवाह न करने की बात पर अडिग रहते हैं। एक दिन हरदौल के बड़े भाई महाराज जुझारू सिंह लाला हरदौल को प्रजा का महामंत्री बना देते हैं और कहते हैं अब से राज कार्य के साथ ब्रह्मचर्य जीवन आसानी से बिता सकोगे। यह बात सभा के पूर्व महामंत्री को पता चलती है। वह महाराजा जुझारू सिंह और लाला हरदौल के बीच फूट डालने का काम करता है। वह महाराजा जुझारू के पास आकर कहता है कि लाला हरदौल ब्रम्हचर्य जीवन नहीं बिता रहे हैं बल्कि लाला हरदौल का भाभी के संग प्रेम प्रसंग में है। यह बात सुनते ही राजा जुझारू सिंह गुस्से से महल आते हैं और अपनी पत्नी पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि यदि तुम्हें पतिव्रता को सिद्ध करना है तो तुम्हें हरदौल को मारना पड़ेगा। उसके भोजन में जहर मिलाना होगा। तभी वे इस महल में कदम रखेंगे और महारानी को पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे। अंत में दिखाया कि भाभी परेशान रो रही होती है जिसे देख लाला हरदौल अपनी भाभीन से पूछते हैं कि माता भाभी तुम क्यों आंसू बहा रही हो, रोती हुई भाभी जवाब देती हैं कि हरदौल तुम्हारे और हमारे संबंध को किसी ने गलत तरीके से समाज में प्रस्तुत कर दिया है जिसके चलते महाराज ने मुझे कई चुनौतियां दी हैं और महारानी जहर वाली बात हरदौल को बता देती हैं। तभी पास में रखे जहर मिले भोजन को लाला हरदौल अपने हाथ से उठाकर खा लेते हैं और उनके प्राण वहीं शरीर से छूट जाते हैं। प्रस्तुति में मंच पर इकराम मास्टर (जुझारू सिंह), इरशाद खान (हरदौल), रफीक खां (मंत्री), शानू (भाभी), शराफत (बहन) ने अभिनय किया। इनके साथ संगत में ढोलक पर गुड्डू खां, नक्कारा पर अकबर खां एवं चुन्ना खां, हारमोनियम पर फरीद खां मौजूद रहे।

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