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27 सितम्बर को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद
ऑल इंडिया टेªड यूनियन कांग्रेस (एटक) अन्य केंद्रीय श्रम संगठनों एवं स्वतंत्र फेडरेशन/एसोसिएशन द्वारा 9 अगस्त 2021 को लोकतंत्र बचाओ देश बचाओ के नारे के साथ ’’भारत बचाओ दिवस’’ मनाकर इस सरकार को देश विरोधी नीतियों को लागू न करने का अगाह किया था इस आंदोलन में राजनीतिक दलों में सारे वामपंथी दल, कांग्रेस, टीएमसी, शिवसेना, डीएमके, वाईएसआरसी, टीआरएस, आप, एनसीपी ने अपना समर्थन व्यक्त किया था परन्तु इस सरकार का लक्ष्य स्पष्ट होता जा रहा है, यह सरकार मजदूरों के श्रम कोड में परिवर्तन कर व बगैर चर्चा के लागू करना चाहती है।
वहीं पब्लिक सेक्टर को निजी हाथों में देकर पूंजीपतियों के प्रति अपनी कृतज्ञता बताने का प्रयास कर रही है। बैंक के राष्ट्रीयकरण के द्वारा बैंक को पूंजीपतियों के हाथों से सरकारी क्षेत्र में लाकर देश के विस्तार में एक लाभकारी एवं जनहितकारी फैसला लिया गया था परन्तु यह सरकार ने दो राष्ट्रीकृत बैंकों को निजी हाथों में देने का जो फैसला किया वह राष्ट्रीय सम्पदा को बैचने का देश के प्रति देशद्रोह करने का जो कार्य कर रही है, जिसका बैंकिंग जगत में कार्यरत यूनियनों द्वारा निरंतर विरोध किया जा रहा है व 15 एवं 16 मार्च 2021 की सफलतम हड़ताल जिसमें बैंक की पूर्ण तालाबंदी थी उसमें इंटक एवं बीएमएस यूनियन ने भी साथ दिया था। इसी तरह मोदी सरकार का नेशनल मोनेटाइजेशन पाईप लाईन का निर्णय कर सरकार द्वारा सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग, रेल्वे, बिजली, पाईप लाईन एवं नेचुरल गैस, सिविल एविएशन, शिपिंग पोर्टस और वाटर वेज टेली कम्युनिकेशंस, खाद्य एवं सार्वजनिक विवरण, माइनिंग, कोल हाउसिंग एवं अर्बन अफेयर्स मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं को निजी हाथों में देकर देश की संपदा को बेचने का काम सरकार कर रही है जिसके अंतर्गत 2025 तक रेल्वे से 26 फीसदी, 14 फीसदी नेशनल इन्फ्रास्टेक्चर प्लान, रेल्वे स्टेशन, 15 रेल्वे स्टेडियम, टेªन, मइटेन रेल्वे आदि एवं एयरपोर्ट दो स्टेडियम भी बेचे जायेंगे। सरकार के इस निर्णय से देश में युवाओं को रोजगार के अवसर कम होंगे व वैसे ही बेरोजगारी की दर देश में उच्चतम स्तर पर है। इसी तरह हमारे देश का अन्नदाता किसान जो पिछले 10 माह से आंदोलन पर है, उन पर कृषि विरोधी काले कानून वगैर चर्चा के संसद, किसान संगठनों से बगैर चर्चा के एक तरफा थोपे जा रह है व फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य की जाईज मांग को लेकर किसान आंदोलनरत हैं व सरकार उनको आतंकवादी, खालिस्तानी, तालिबानी न जाने इस सरकार के मंत्री अलग-अलग मांगों से सम्बोधित करते देखे गये हैं। इस सरकार द्वारा लोकतंत्र में प्रजातांत्रिक तरीके से प्राप्त हड़ताल के अधिकार को लेकर डिफेन्स में कार्यरत कर्मचारियों को केबिनेट में एक तरफा निर्णय लें। उन्हें हड़ताल से वंचित कर एवं दो साल की सजा के प्रावधान के साथ डराया व धमकाया जा रहा है। इन नीतियों के चलते देश की 70 सालों में बनी सम्पदा को निजी हाथों में जाना सुनिश्चित है। श्रम कानूनों में परिवर्तन कर असंगठित क्षेत्र में मजदूरों को रोजगार के अवसर निरंतर कम होते जा रह हैं। पेट्रोल, डीजल एवं ग्रहणीयों की कुकिंग गैस देश में अनियंत्रित स्थिति में है। घरों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कोरोना कॉल में सरकार का रवैया देश की जनता के प्रति सकारात्मक नहीं रहा व देश में कोरोना काल में मरने वालों की संख्या सरकार के पास न होना व ऑक्सीजन की कमी से हुई मृत्यु का हिसाब संसद में न होना सरकार की विफलता का परिणाम है। हम आॅल इंडिया टेªड यूनियन कांग्रेस (एटक) म.प्र. इन नीतियों का हमेशा विरोध करता रहा है व यह निर्णय करता है कि भारतीय किसानों के संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जो 27 मार्च को भारत बंद का जो आह्वान किया है उसको अपनी एकजुटता प्रगट करता है और मांग करता है कि सरकार अपना अहम छोडे़ व जनहित में कार्य करें व देश विरोधी निर्णय तुरंत वापस लें वरना देश एवं प्रदेश के कोने-कोने में जन आंदोलन के माध्यम से सरकार की जनविरोधी, श्रम विरोधी, मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, युवा विरोधी, नीतियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन एवं हड़ताल की जावेगी।




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